केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ‘पहले एडवांस नेशनल इनकम एस्टीमेट’ ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है. वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से उल्लेखनीय रूप से बेहतर है. यह आंकड़ा न केवल भारत के आर्थिक लचीलेपन को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत विकास पथ पर अग्रसर होने का प्रमाण है. इस अनुमान की आधारशिला मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र हैं, जहां 7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि की उम्मीद है. मैन्युफैक्चरिंग को ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाओं ने गति प्रदान की है. ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उप-क्षेत्रों में निवेश बढ़ा है, जिससे निर्यात में उछाल आया है. इसी तरह, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित नीतियों का फायदा उठा रहा है. गति योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं ने न केवल रोजगार सृजन किया है, बल्कि पूंजीगत व्यय को प्रोत्साहित किया है. ये दोनों क्षेत्र अर्थव्यवस्था के इंजन के रूप में उभर रहे हैं, जो ग्रॉस वैल्यू एडेड को 7.3 प्रतिशत बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे. सर्विस सेक्टर, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 55 प्रतिशत योगदान देता है, भी स्थिरता बनाए रखेगा. आईटी, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन में डिजिटल क्रांति ने इस क्षेत्र को मजबूत बनाया है. यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स और फिनटेक का उदय उपभोक्ता मांग को बढ़ावा दे रहा है. कुल मिलाकर, ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत निजी खपत, निवेश और निर्यात के संतुलित मिश्रण पर आधारित विकास कर रहा है. वैश्विक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति के दौर में भारत की यह प्रक्षेपित वृद्धि दर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार करेगी. दरअसल,घरेलू स्तर पर, मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, विदेशी मुद्रा भंडार 650 अरब डॉलर से ऊपर है, और फिस्कल डेफिसिट लक्ष्यों के अनुरूप है. ये कारक निवेशकों का विश्वास बढ़ा रहे हैं, जिसका प्रमाण एफडीआई में वृद्धि से मिलता है. सकारात्मक चित्र के बावजूद, कुछ चुनौतियां बरकरार हैं. ग्रामीण मांग में सुधार की जरूरत है, जहां मानसून पर निर्भरता बनी हुई है. कृषि क्षेत्र, जो जीडीपी का 15-18 प्रतिशत है, में विविधीकरण आवश्यक है. साथ ही, कौशल विकास और रोजगार सृजन पर जोर देना होगा, क्योंकि युवा आबादी डेमोग्राफिक लाभांश का लाभ उठाने को तैयार है. जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण भी दीर्घकालिक जोखिम हैं. फिर भी, ये चुनौतियां अवसरों में बदल सकती हैं. हरित ऊर्जा पर निवेश और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से सतत विकास सुनिश्चित होगा. कुल मिलाकर केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के ये अनुमान भारत की आर्थिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं. औद्योगिक गतिविधियों, बुनियादी ढांचे और सेवाओं के संयोजन से न केवल जीडीपी लक्ष्य हासिल होगा, बल्कि समावेशी विकास भी सुनिश्चित होगा. सरकार की नीतिगत स्पष्टता और निजी क्षेत्र की भागीदारी इसकी कुंजी है. यदि ये रुझान बने रहे, तो भारत 2030 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का सपना साकार कर सकता है.
