इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैले उल्टी दस्त के प्रकोप के बीच अब तक मृतक संख्या 20 हो गई है. बुधवार को 24 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 4 को रेफर किया. वर्तमान में अस्पतालों में 56 मरीज भर्ती हैं, जबकि 9 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं. अब तक 437 मरीजों को भर्ती किया जा चुका है, जिनमें से 381 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं. हालात पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में निगरानी और फॉलोअप तेज कर दिया है.
सीएमएचओ डॉक्टर माधव हसानी ने बताया कि बुधवार को भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में उन मरीजों का फॉलोअप किया, जो इलाज के बाद घर लौट चुके हैं. इस दौरान 189 मरीजों का फॉलोअप लिया. साथ ही क्षेत्र में ओआरएस बनाने की विधि, हाथ धोने के सही तरीके और उल्टी दस्त से बचाव व उपचार से संबंधित जागरूकता सामग्री का वितरण किया. विभाग ने 686 ओआरएस और जिंक किट भी बांटीं.
इधर, नर्मदा जल की पाइप लाइनों की सफाई का कार्य जारी है. स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि पाइप लाइन शुद्धिकरण पूरा होने तक भागीरथपुरा क्षेत्र के निवासी नर्मदा जल का उपयोग न करें. इसके लिए 6 जनवरी की शाम और 7 जनवरी की सुबह मेगा माइकिंग कर पूरे प्रभावित इलाके में सतर्कता संदेश प्रसारित किया. जिलाधीश के निर्देश पर क्षेत्र में मरीजों के परिवहन के लिए दो एम्बुलेंस तैनात की गई हैं.
इसके साथ ही 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है. गंभीर मरीजों को एमवाय अस्पताल और अरविंदो अस्पताल में, जबकि बच्चों को चाचा नेहरू अस्पताल रेफर किया जा रहा है. जो मरीज निजी अस्पतालों में उपचार ले रहे हैं, वहां भी नि:शुल्क इलाज, जांच और दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दे दिए गए हैं. वहीं जिन मरीजों की मौत हुई है, उनमें बुजुर्गों और पहले से कमजोर स्वास्थ्य वाले लोगों की संख्या अधिक है. इलाज के दौरान कुछ मरीजों की हालत में सुधार भी हुआ, लेकिन बाद में अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। विभाग अब मौतों के हर मामले का अलग अलग मेडिकल ऑडिट कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संक्रमण की गंभीरता किस स्तर तक पहुंच गई थी.
महाराष्ट्र में हुआ बुजुर्ग का अंतिम संस्कार
भागीरथपुरा में रह रहे श्रावण नथ्थु खुपराव की मौत 29 दिसंबर को इलाज के दौरान अस्पताल में हुई थी. उनके बेटे श्रीकृष्ण ने बताया कि 25 दिसंबर को उन्हें उल्टी दस्त की शिकायत हुई थी. तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था, 26 दिसंबर को हालत में कुछ सुधार हुआ, लेकिन इसके बाद अचानक स्थिति बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई. श्रावण खुपराव का अंतिम संस्कार महाराष्ट्र के बुलढ़ाना जिले के सेलापुर गांव में किया, जो उनका पैतृक गांव है. परिवार इंदौर में रहकर जीवनयापन करता था. उनका पोता नगर निगम की पानी की टंकी पर कार्यरत है, जबकि बेटा सुरक्षाकर्मी के रूप में काम करता है.
47 वर्षीय रामकली की भी गई जान
इसी प्रकोप में 47 वर्षीय रामकली पत्नी जगदीश की भी मौत हो गई. परिजनों के अनुसार 28 दिसंबर को अचानक उन्हें उल्टी दस्त की शिकायत हुई थी. हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. परिजनों ने बताया कि इससे पहले रामकली को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी और वे पूरी तरह स्वस्थ थीं
