तुर्कमान गेट ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान झड़प, दिल्ली पुलिस ने दस लोगों को हिरासत में लिया

नयी दिल्ली, 07 जनवरी (वार्ता) दिल्ली पुलिस ने तुर्कमान गेट इलाके में ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान हुई हिंसक झड़पों के बाद 10 लोगों को हिरासत में लेकर मामला दर्ज किया है। यह घटना बुधवार तड़के फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई। यह कार्रवाई नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गयी, जिसका उद्देश्य रामलीला मैदान की 400 गज भूमि पर बने अवैध ढांचे को हटाना था। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात ध्वस्तीकरण के दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस और एमसीडी टीम पर पत्थर और ईंटें फेंकी। मौके से सामने आए वीडियो में कुछ लोग पुलिसकर्मियों पर हमला करते दिखाई दिए। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागे गए। इसके बाद अतिक्रमित क्षेत्र को खाली करा लिया गया। मध्य रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा द्वारा जारी बयान में कहा गया कि ध्वस्तीकरण से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूरे इलाके को नौ उप-क्षेत्रों में विभाजित किया गया था, जिनमें प्रत्येक की निगरानी एक वरिष्ठ अधिकारी कर रहा था। शांति बनाए रखने के लिए अमन समिति सहित स्थानीय हितधारकों के साथ पूर्व में समन्वय बैठकें भी की गयी थीं।

बयान में बताया गया कि ध्वस्तीकरण के दौरान कुछ शरारती तत्वों ने पत्थरबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। पुलिस ने न्यूनतम और संतुलित बल प्रयोग करते हुए हालात पर काबू पाया और बिना किसी बड़े टकराव के सामान्य स्थिति बहाल कर दी। दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह न्यायालय के निर्देशों को कानून के दायरे में रहकर और संवेदनशीलता के साथ लागू करने तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए लोगों में से तीन की पहचान मोहम्मद आरिब (25), मोहम्मद कैफ (23) और मोहम्मद काशिफ (25) के रूप में की है। सभी तुर्कमान गेट निवासी हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य पत्थरबाजों की पहचान की जा रही है और उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।” मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 221, 132, 121, 191(2), 191(3), 223(ए), 3(5) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा-3 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है। अग्रिम जांच जारी है।

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