इंदौर: केनरा बैंक की नवलखा शाखा से फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों का कर्ज लेने के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. मामले में बैंक को करीब 2 करोड़ 55 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप में उद्योग संचालक महिला, उसके पति, तत्कालीन शाखा प्रबंधक और बैंक के पैनल एडवोकेट के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है.
ईओडब्ल्यू की अधिकृत जानकारी के अनुसार आरोपी मेसर्स लक्ष्य इम्पिमेंट एंड इंजीनियरिंग की प्रोपराइटर नेहा तांबी, उनके पति एवं गारंटर मनीष तांबी, केनरा बैंक नवलखा शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक पवन कुमार झा और बैंक के पैनल एडवोकेट विकास कुमार वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया है.
जांच में सामने आया कि नेहा तांबी ने अपने पति मनीष तांबी को गारंटर बनाकर 3 अक्टूबर 2020 को केनरा बैंक नवलखा शाखा में ओसीसी लिमिट के लिए आवेदन किया था. इसके बाद 17 अक्टूबर 2020 को 1 करोड़ 70 लाख रुपए की ओसीसी लिमिट, 29 सितंबर 2021 को 16 लाख रुपए का टर्म लोन और 21 अक्टूबर 2021 को जीईसीएल के तहत 51 लाख रुपए स्वीकृत कराए गए. इस तरह 2 करोड़ 37 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया.
सिक्योरिटी के रूप में दर्शा दी पूर्व में बिक चुकी संपत्ति
आरोप है कि ऋण के लिए जिस फ्लैट नंबर 402, क्लासिक क्राउन, ओल्ड पलासिया, इंदौर को कोलेटरल सिक्योरिटी के रूप में दर्शाया, वह संपत्ति वर्ष 2007 में ही अन्य लोगों को विक्रय की जा चुकी थी. इसके बावजूद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उक्त फ्लैट को बंधक दिखाया. जांच में यह भी सामने आया कि उक्त संपत्ति के मूल दस्तावेज पहले से ही बैंक ऑफ इंडिया, कंचनबाग शाखा में बंधक थे और वह खाता एनपीए घोषित होकर संपत्ति सीज की जा चुकी थी. ईओडब्ल्यू जांच में पाया गया कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार झा ने संपत्ति और औद्योगिक यूनिट की गलत विजिट रिपोर्ट दी, जबकि बैंक के पैनल एडवोकेट विकास कुमार वर्मा ने फर्जी लीगल सर्च रिपोर्ट प्रस्तुत कर संपत्ति को विवादमुक्त बताया. बाद में बैंक के वैधानिक ऑडिट में न तो पीथमपुर स्थित औद्योगिक यूनिट का अस्तित्व पाया और न ही खाते में कोई नियमित कारोबारी लेनदेन, जिसके बाद 31 मार्च 2024 को खाता एनपीए घोषित किया.
मैनेजर द्वारा अवैध लाभ लिए जाने के भी साक्ष्य मिले
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लोन की राशि का बड़ा हिस्सा मेसर्स ब्लू चिप इम्पिमेंट एंड इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर किया, जिसमें मनीष तांबी स्वयं डायरेक्टर हैं और जिसका पता भी वही पीथमपुर स्थित औद्योगिक प्लॉट बताया. इसे लोन राशि का डायवर्जन माना जा रहा है. इसके अलावा व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार झा द्वारा निजी खातों में अवैध लाभ लिए जाने के भी साक्ष्य ईओडब्ल्यू को मिले हैं. शून्य पर दर्ज एफआईआर को भोपाल स्थित ईओडब्ल्यू थाने में अपराध नम्बर 01/2026 के तहत दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है. अधिकारियों के मुताबिक मामले में आगे और भी खुलासे होने की संभावना है
