
जबलपुर। शहर के मानस भवन में आयोजित चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का भव्य समापन श्रद्धा, संस्कृति और शोध के अद्भुत संगम के साथ सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में बिहार के राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामायण चिंतन का एक महत्वपूर्ण सत्संग सिद्ध हुआ। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य बाबा कल्याण दास, पूज्य ज्ञानेश्वरी दीदी, मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह, शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सांसद आशीष दुबे, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अभिलाष पांडे, आयोजन अध्यक्ष अजय बिश्नोई, सचिव डॉ. अखिलेश गुमास्ता, पूर्व न्यायाधीश पंकज गौर, अधिवक्ता रवि रंजन सहित बड़ी संख्या में विद्वान, साधु-संत एवं संस्कारधानीवासी उपस्थित रहे। स्वागत उद्बोधन में आयोजन अध्यक्ष अजय बिश्नोई ने सम्मेलन के सभी आयामों पर प्रकाश डालते हुए जबलपुर में आयोजन के महत्व को रेखांकित किया संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि रामायण मात्र ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली आधारशिला है। शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि राज्यपाल को सुनना स्वयं में एक अद्भुत अनुभव है, राम का चरित्र नई पीढ़ी के लिए आचरण का प्रतिमान है।
रामादिवत् समाचरेत, न रावणादिवत्
अर्थात राम के समान आचरण करें, रावण के समान नहीं। सांसद आशीष दुबे ने कहा कि राम सुनने पढ़ने के साथ प्रमुखता जीने की चीज है चारित्रिक मूल्यों को मानवीय मूल्यों को हम एक शब्द में राम कहते हैं। अपने ओजस्वी उद्बोधन में राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा भारत की संस्कृति भेदभाव से नहीं, बल्कि आत्मा, चेतना और बुद्धि से परिभाषित होती है। परमात्मा प्रत्येक हृदय में निवास करता है, इसलिए हर शरीर एक मंदिर है। भारत का धर्म ही आध्यात्मिकता है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन से निकली एकात्मकता की भावना हमारी साझा विरासत है, जिसका सार भगवान कृष्ण एवं कपिल मुनि के उपदेशों में भी मिलता है।
इंडो-थाई रामायण फोरम पर चर्चा
सत्र के आरंभ में इंडो-थाई रामायण फोरम पर विशेष चर्चा हुई। कोऑर्डिनेटर अमरेंद्र नारायण ने बताया कि इस फोरम की स्थापना प्रथम विश्व रामायण सम्मेलन में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच रामायण आधारित अकादमिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करना है। प्रो. नरेंद्र कौशिक (जयपुर) ने राम के पूर्वजों शिवि, इक्ष्वाकु, सगर, भागीरथ, दिलीप, रघु आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो. अभिलाषा सिंह (अमरकंटक) एवं अध्यक्ष रविंद्र वाजपेई ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रो. नीलांजना पाठक ने रामायण की पवित्र वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं से प्राप्त जीवन शिक्षाओं पर व्याख्यान दिया। शैलेंद्र तिवारी (भोपाल) ने युवाओं के संदर्भ में भगवान राम और माता सीता के त्याग पर सारगर्भित विचार रखे।
