नई दिल्ली, 01 जनवरी, 2026: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की गंभीर स्थिति को लेकर जब क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किए गए, तो वे पत्रकारों पर बिफर पड़े। अपने विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में जारी इस मानवीय त्रासदी और निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों के भुगतान पर मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय विजयवर्गीय ने अमर्यादित लहजे में कहा, “छोड़ो यार, तुम फोकट (फालतू) प्रश्न मत पूछो।” इस दौरान उनकी एक संवाददाता के साथ तीखी बहस भी हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।
विजयवर्गीय के इस बर्ताव पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार पर सत्ता के अहंकार में डूबे होने का आरोप लगाया। पटवारी ने दावा किया कि जहरीले पानी से मौतों की संख्या अब 10 तक पहुँच चुकी है, लेकिन जिम्मेदार मंत्री अपनी विफलता छिपाने के लिए बदतमीजी पर उतारू हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से नैतिकता के आधार पर कैलाश विजयवर्गीय के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि पीड़ितों को सांत्वना देने के बजाय मंत्री का ऐसा व्यवहार बेहद निंदनीय है।
मामले के तूल पकड़ते ही कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर सफाई पेश करते हुए माफी मांग ली है। उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि पिछले दो दिनों से लगातार राहत कार्यों में जुटे रहने और अपनों को खोने के गहरे दुख के कारण उनके शब्द गलत निकल गए। विजयवर्गीय ने भावुक अपील करते हुए कहा कि वे पीड़ितों के लिए रात-दिन काम कर रहे हैं और जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, वे चैन से नहीं बैठेंगे। प्रशासन ने भी अब स्थिति को संभालने के लिए निजी अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार की निगरानी बढ़ा दी है।

