नई दिल्ली, 01 जनवरी, 2026: राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी की रिहर्सल पूरे जोश के साथ शुरू हो गई है। गणतंत्र दिवस 2026 की परेड इस बार एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनेगी, क्योंकि पहली बार भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’ (पशु-दस्ता) एक संगठित रूप में अपनी सामरिक शक्ति का प्रदर्शन करेंगे। इस विशेष दस्ते में लद्दाख के दुर्गम इलाकों में सेवा देने वाले दो कूबड़ वाले ‘बैक्ट्रियन ऊंट’, शून्य से नीचे के तापमान में अडिग रहने वाली ‘जांस्कर पोनी’, और आसमान से दुश्मन पर नज़र रखने वाले ‘शिकारी पक्षी’ (रैप्टर्स) शामिल होंगे। यह प्रदर्शन सेना की मशीनी ताकत के साथ-साथ इन वफादार पशु-साथियों के अतुलनीय योगदान को दुनिया के सामने रखेगा।
परेड में शामिल बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर पोनी लद्दाख और सियाचिन जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में रसद पहुँचाने के विशेषज्ञ माने जाते हैं। ये मूक योद्धा 15,000 फीट की ऊँचाई और भीषण ठंड में भी भारी साजो-सामान ढोने में सक्षम हैं। वहीं, आधुनिक युद्ध कौशल का परिचय देते हुए ‘रैप्टर्स’ (शिकारी पक्षी) सेना की एंटी-ड्रोन तकनीक का हिस्सा बनेंगे, जिनका मुख्य कार्य दुश्मन के छोटे ड्रोनों की निगरानी कर हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इन पशुओं को सेना की लॉजिस्टिक और इंटेलिजेंस विंग का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए कड़ी मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई है।
आत्मनिर्भर भारत की पहल को दर्शाते हुए परेड में 16 कुत्तों का ‘K9 दस्ता’ भी शामिल होगा। इसमें पहली बार मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड और राजापलायम जैसी भारतीय नस्लों को प्रमुखता दी गई है। इन कुत्तों को मेरठ के ‘रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स’ (RVC) केंद्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों और बम निरोधक कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जब यह दस्ता कर्तव्य पथ से गुजरेगा, तो यह संदेश देगा कि भारत की सुरक्षा में केवल अत्याधुनिक मिसाइलें ही नहीं, बल्कि ये वीर बेजुबान साथी भी अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं।

