नयी दिल्ली, (वार्ता) भारतीय खेलों में एथलीटों के नेतृत्व वाले शासन और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) 10 जनवरी 2026 को गुजरात के अहमदाबाद में पहले राष्ट्रीय एथलीट फोरम का आयोजन करेगा।
आईओए ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि एथलीट फोरम इस बात का प्रमाण है कि वह सिर्फ सलाह-मशविरे से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि एथलीट उन नीतियों को आकार देने में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभाएं जो उनके करियर, कल्याण और भविष्य को प्रभावित करती हैं। यह फोरम देश भर के मौजूदा और पूर्व एथलीटों, एथलीट प्रतिनिधियों और प्रमुख हितधारकों को सीधी, समाधान-केंद्रित बातचीत के लिए एक साथ लाएगा।
आईओए अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा, “भारत के खेल इतिहास में यह पहली बार है कि एथलीटों को सीधे शासन को प्रभावित करने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय फोरम के माध्यम से एक साथ लाया जा रहा है। एथलीटों की आवाज़ अब हाशिये पर नहीं रह सकती। यह फोरम एथलीटों के नेतृत्व वाले सुधार, जवाबदेही और साझा निर्णय लेने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है।”
डॉ. उषा ने कहा, “एथलीटों की गरिमा, सुरक्षा और भलाई की रक्षा किए बिना खेल में लगातार उत्कृष्टता असंभव है। यह फोरम यह स्पष्ट करता है कि एथलीटों का कल्याण नीति के केंद्र में है। यह फोरम एथलीटों के अधिकारों और जिम्मेदारियों, नैतिक और पारदर्शी गवर्नेंस, सुरक्षित खेल और अखंडता, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण, डोपिंग विरोधी शिक्षा, शिकायत निवारण और संरचित करियर मार्गों सहित अहम विषयों पर ध्यान केंद्रित करेगा। चर्चाओं का उद्देश्य एथलीटों की प्रतिक्रिया को कार्रवाई योग्य सुधारों में बदलना होगा।”
आईओए एथलीट आयोग की अध्यक्ष एमसी मैरीकॉम ने कहा,”एथलीट सिस्टम को अंदर से जानते हैं। यह फोरम हमें चुनौतियों और समाधानों के बारे में खुलकर बात करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक विश्वसनीय मंच देता है कि एथलीटों के अनुभव शासन और सुधारों में परिलक्षित हों।”
आईओए के एथलीट आयोग के उपाध्यक्ष अचंत शरत कमल ने कहा, “एथलीटों के रूप में हम अक्सर फैसले लिए जाने के बहुत बाद नीतियों का प्रभाव महसूस करते हैं। यह फोरम इस समीकरण को बदलता है। यह एथलीटों को फैसलों से पहले अपनी बात रखने का मौका देता है और एक अधिक पारदर्शी और जवाबदेह खेल इकोसिस्टम बनाने में मदद करता है।”
