इंदौर: आईएएस अधिकारी से जुड़े फर्जी न्यायिक आदेश मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. प्रकरण में आरोपियों को जमानत देने वाले सेशन जज का इंदौर से तबादला कर दिया है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है.आईएएस संतोष वर्मा से जुड़े फर्जी आदेश मामले में हाईकोर्ट जबलपुर के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा प्रशासनिक आदेश जारी किया है. आदेश के तहत इंदौर जिला न्यायालय में पदस्थ सेशन जज प्रकाश कसेरा का तबादला कर उन्हें सीधे रामपुर सेशन कोर्ट में पदस्थ किया है. यह तबादला आदेश एक दिन पूर्व पारित हुआ है.
यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है, जब इंदौर के एमजी रोड थाना पुलिस ने फर्जी न्यायिक आदेश तैयार करने के आरोप में केस दर्ज किया था. इस प्रकरण में उस समय इंदौर में पदस्थ जज वीरेंद्र सिंह रावत और उनकी कोर्ट की टाइपिस्ट नीतू सिंह को आरोपी बनाया गया था। दोनों ही वर्तमान में निलंबित हैं. प्रकरण में सेशन जज प्रकाश कसेरा ने पहले निलंबित जज वीरेंद्र सिंह रावत को अग्रिम जमानत दी थी.
इसके बाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई टाइपिस्ट नीतू सिंह को रिमांड अवधि के दौरान 19 दिसंबर 2025 को जमानत प्रदान की गई थी. इधर, टाइपिस्ट नीतू सिंह की गिरफ्तारी के बाद एसीपी विनोद दीक्षित ने बयान दिया था कि जांच के दौरान आईएएस संतोष वर्मा और निलंबित जज वीरेंद्र सिंह रावत पुलिस को अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं. इसी आधार पर पुलिस अब दोनों की जमानत निरस्त कराने के लिए कोर्ट में आवेदन देने की तैयारी कर रही है. पुलिस का कहना है कि मामले में जांच जारी है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी.
