
भोपाल। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं वर्किंग कमेटी के सदस्य बी. के. हरिप्रसाद ने केंद्र सरकार पर संसद में किए गए हालिया विधायी बदलावों के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रभावी रूप से कमजोर करने का आरोप लगाया।
भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए हरिप्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार “सुधारों” के नाम पर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में काम कर रही है और गरीब ग्रामीण नागरिकों से उनके काम के संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, श्रम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास की अवधारणा पर सीधा हमला बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से ही मोदी सरकार मनरेगा के विरोध में रही है। बजट में कटौती, राज्यों के वैधानिक बकाया को रोकना, जॉब कार्ड रद्द करना और आधार आधारित भुगतान अनिवार्य करने से लगभग सात करोड़ मजदूर योजना से बाहर हो गए हैं। इसके चलते पिछले पांच वर्षों में मजदूरों को औसतन केवल 50 से 55 दिन का ही काम मिल सका है।
हरिप्रसाद ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार लगभग 50,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ राज्यों पर डाल रही है, जबकि डिजिटल प्रणाली के जरिए नियंत्रण केंद्रित किया जा रहा है, जिससे सहकारी संघवाद और जमीनी स्तर पर निर्णय प्रक्रिया कमजोर हो रही है।
नेशनल हेराल्ड मामले पर उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के केस को अदालत द्वारा खारिज किए जाने का स्वागत करते हुए इसे “बदले की राजनीति” पर करारा प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को उजागर करता है और इससे साबित होता है कि “सच की जीत हुई है।”
