नई दिल्ली: नए साल में भारत-इजराइल के रक्षा संबंध एक नए मुकाम पर पहुँचने वाले हैं। अब भारत सिर्फ इजराइली हथियारों का ग्राहक नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देश मिलकर भारत में ही नए जमाने के उन्नत हथियार प्रणालियों का निर्माण करेंगे। पिछले महीने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इजराइल का दौरा किया था, जहाँ इस मुद्दे पर व्यापक बातचीत हुई। भारत-इजरायल जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए और आपसी सहयोग पर नए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इजराइल अब मेक इन इंडिया कार्यक्रम में भी पार्टनर बनेगा और भारी निवेश करेगा।
भारत में हथियारों के संयुक्त उत्पादन से दोनों देशों को काफी फायदा होगा। यह साझेदारी तुर्की और पाकिस्तान के गठजोड़ को करारा जवाब देगी, क्योंकि इजराइल की तकनीक तुर्की से मीलों आगे है। इस सहयोग से भारत की घरेलू रक्षा जरूरतें पूरी होंगी और इजराइल की हथियार निर्माण फैक्ट्रियाँ भी युद्ध की स्थिति में सुरक्षित रहेंगी। भारत में अब फाल्कन AWACS, हेरॉन ड्रोन, नेगेव LMG और बराक सिस्टम जैसे एडवांस सिस्टम बनने का रास्ता साफ हो गया है।
इस साझेदारी के तहत भारत में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और गाइडेड वेपंस, हेरॉन जैसे लोइटरिंग मुनिशंस, असॉल्ट राइफल्स, मशीन गन्स और लेजर-गाइडेड मिसाइल्स का निर्माण किया जा सकेगा। भारत ने अब तक इजराइल से कई उन्नत हथियार प्रणालियां ली हैं, जिनमें बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम (मध्यम से लंबी दूरी की मिसाइल) और स्पाइडर मिसाइल शामिल हैं। भारतीय इंजीनियर और इजराइल की उन्नत तकनीक मिलकर दुनिया के सबसे घातक हथियार बनाने में सक्षम हैं।

