स्टॉकहोम, 14 दिसंबर (वार्ता) कई मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने बेलारुस के मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता अलेस बियाल्यात्सकी की रिहाई का स्वागत किया है। मानवाधिकारों के लिए कार्य करने वाली संस्था राइट लाइवलीहुड ने उनकी रिहाई का स्वागत करते हुए इसे ‘न्याय की दिशा में बहुत देर से आया कदम’ बताया है। संस्था ने कहा कि जुलाई 2021 में उनकी कैद अवैध और राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी। संस्था ने जोर दिया, “हम वियासना की सदस्य मारफा राबकोवा और बेलारूस में अपने मूल अधिकारों का प्रयोग करने के कारण कैद किये गये सभी अन्य लोगों की तत्काल रिहाई की अपनी आपात अपील को फिर से दोहराते हैं।” उल्लेखनीय है कि वियासना मानवाधिकार केंद्र की स्थापना श्री बियाल्यात्सकी ने की थीं।। श्री बियाल्यात्सकी के साथ वियासना के उनके दो अन्य दो सहयोगियों को भी रिहा किया गया है।
गौरतलब है कि बेलारुस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको के 2020 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी। इन्हीं प्रदर्शनों के विरोध में की गयी कार्रवाई के हिस्से के रूप में श्री बियाल्यात्सकी की 2021 में गिरफ्तारी की गयी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल के अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको से मिलने के बाद 123 कैदियों को आम माफी के तहत शनिवार को रिहा किया गया था। राइट लाइवलीहुड के कार्यकारी निदेशक ओले वॉन उएक्सकुल ने कहा, “अलेस बियाल्यात्सकी को कभी भी जेल में नहीं होना चाहिए था। उनकी गिरफ्तारी शुरू से ही गैरकानूनी थी और इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण मानवाधिकार कार्य को दबाना था। हम उनकी रिहाई का स्वागत करते हैं, लेकिन सच्चा न्याय तभी होगा जब उनके सभी सहयोगी मुक्त होंगे और बेलारूस के लोग वास्तव में लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से अपने नेताओं का चयन कर सकेंगे।” गौरतलब है कि वर्ष 2022 में अलेस बियाल्यात्सकी को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

