इंदौर: शहर में नगर निगम की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक ढिलाई और अफसरों की जवाबदेही को लेकर सियासी पारा उस समय गरमा गया है, जब विपक्षी संगठन ने निगम के मौजूदा हालात को कटघरे में खड़ा करते हुए प्रतीकात्मक लेकिन तीखी मांग सामने रखी है, जिससे शहर के प्रशासनिक मॉडल पर बहस छिड़ गई है.जिला कांग्रेस सेवादल ने नगर निगम में अधिकारियों की अनुपस्थिति, बैठकों में देरी और जमीनी कामकाज ठप होने का हवाला देते हुए महापौर से एक दिन के लिए जिम्मेदारी सौंपने की मांग की है. संगठन का कहना है कि यदि वास्तव में सिस्टम सक्रिय है, तो यह प्रयोग यह साबित कर देगा कि निगम के अधिकारी निर्वाचित प्रतिनिधियों के निर्देशों का पालन करने की स्थिति में हैं या नहीं.
जिला कांग्रेस सेवादल के कार्यकारी अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल ने हाल ही में महापौर द्वारा बुलाई गई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकारियों की गैरहाजिरी और महापौर को डेढ़ घंटे तक इंतजार कराए जाने की घटना तथाकथित इंदौर मॉडल की असल तस्वीर दिखाती है. उनका आरोप है कि निगम के एमआईसी सदस्य और पार्षद तक यह स्वीकार कर रहे हैं कि कार्यकाल के शेष डेढ़ साल में जनता के बीच जाने का नैतिक साहस नहीं बचा है, जो प्रशासनिक जवाबदेही के अभाव का संकेत है.
सड़कों की हालत बदहाल
सेवादल नेताओं का कहना है कि शहर की सड़कों की हालत बदहाल है, ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है और पहली बारिश में ही हालात बेकाबू हो जाते हैं. कई विकास योजनाएं केवल फीताकाट, बोर्ड और प्रचार तक सीमित रह गई हैं. तंज कसते हुए नेताओं ने कहा कि कुछ सड़कों को अब निर्माणाधीन नहीं बल्कि अनंतकालीन परियोजना कहा जाना चाहिए.
स्पष्ट किया गया है कि यदि एक दिन के लिए जिम्मेदारी दी जाती है तो सभी निगम अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी. लंबित परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी, सड़क और ड्रेनेज को प्राथमिकता में रखकर ठोस फैसले लिए जाएंगे और यह साफ किया जाएगा कि प्रशासन की गाड़ी कौन चला रहा है और ब्रेक कहां अटका हुआ है. सेवादल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जिसमें जनप्रतिनिधि भी प्रतीक्षा करते नजर आते हैं और अफसर जवाबदेह नहीं होते
