दुकान से पहले बिल लाओ, फिर बर्तन खरीदेंगे

सिंगरौली। महिला स्व सहायता समूह साझा चूल्हा कार्यक्रम की महिलाओं ने विभाग एवं सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

आज दिन मंगलवार को साझा चूल्हा कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं ने प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ के बैनर तले रैली निकाल कर आईसीडीएस एवं प्रदेश सरकार को आड़े हाथो लिया है। स्व सहायता समूह की महिलाओं ने कहा कि आईसीडीएस के अधिकारी बर्तन खरीदी के लिए पहले बिल मांगते हैं, यह कहां संभव है कि बिना बर्तन खरीदे ही कोई दुकानदार बिल-व्हाउचर दे देगा। साझा चूल्हा कार्यक्रम के स्व सहायता समूहो एवं रसोइयां ने जिला मुख्यालय बैढ़न में रैली निकाल कर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में इस बात का जिक्र किया है कि साझा चूल्हा कार्यक्रम संचालन के लिए समूहों को पॉच महीने के बाद भी राशि नही जारी की जा रही है। जिससे अब योजना का संचालन करने में कठिनाइयां आ रही हैं। समूह को मिलने वाले गेहॅॅू-चावल उचित मूल्य दुकान से उठाव करने के लिए समूह के अध्यक्ष एवं सचिव के अलावा दुकानदार का भी फिंगर पौष मशीन में दर्ज है। दुकानदार का फिंगर है, उसे हटाया जाये। अधिकांश समूहो का खाद्यान्न 5 से 10 किलोग्राम प्रति महीने के मान से जारी किया जाता है। जबकि आंगनवाड़ी केन्द्रो में दर्ज बच्चों के आधार पर जारी किया जाये। साझा चूल्हा संचालन की लागत राशि आंगनवाड़ी केन्द्रों में दर्ज बच्चों के आधार पर जारी हो। इतना ही नही साझा चूल्हा कार्यक्रम में संलग्न रसोइयों के पारिश्रमिक भुगतान अधिकांश समूहो को दो-दो वर्षो से नही किया गया है। आगे कहा कि रसोइयों को पारिश्रमिक भुगतान महीने में पॉच सौ मिलता है। इस महंगाई में कुछ भी नही है, दो हजार रूपये प्रति माह किया जाये। साथ ही जिले के कई सैक्टरो में साझा चूल्हा संचालन ठेकेदारों के द्वारा कराया जा रहा है, यह प्रथा बंद होना चाहिए। संघ के जिलाध्यक्ष सुशीला बृजेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि केन्द्र में बर्तन नही है और जब बर्तन खरीदने की बात कही जाती है तो आईसीडीएस के अधिकारियों का कहना है कि पहले बर्तन का बिल-व्हाउचर लाओ, फिर खरीदी करेंगे। यह कहां तक उचित है। यह भ्रष्टाचार करने का संकेत है।

दो वर्षो से नही मिला मानदेय

साझा चूल्हा कार्यक्रम में संलग्न रसोइयां कार्यकर्ताओं ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के कार्यप्रणाली के ढोल का पोल खोल दिया है। महिलाओं ने आरोप लगाया है कि अधिकांश रसोइयों को दो वर्षो से पारिश्रमिक भुगतान नही मिला है। वहीं स्व सहायता समूहो को भी साझा चूल्हा कार्यक्रम संचालन के लिए कई महीनों से राशि नही दी जा रही है। दबि जुबान में स्व सहायता समूह की महिलाओं ने डीपीओ पर निशाना साधा और कहा कि इनके भी कार्यकाल में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं एवं व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं। करीब पॉच साल से आईसीडीएस की व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हैं। परियोजना अधिकारी, देवसर, सिंगरौली भी इन समस्याओं का निदान नही कर रहे हैं, बल्कि योजनाओं में पलिता लगाते हुये खेला कर रहे हैं, यह बात किसी से छुपी नही है। देवसर परियोजना की कार्यप्रणाली जग जाहिर है।

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