किसी के साथ अन्‍याय नहीं होने देंगे लेकिन कानून व्‍यवस्‍था में हस्‍तक्षेप करने वालों को बख्शेंगे नहीं: सीएम डॉ. यादव

प्रकाश दुबे बालाघाट। बालाघाट में मुख्‍यमंत्री की मौजूदगी में 10 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

सरकार नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने का अवसर दे रही है, वे आगे आएँ और पुनर्वास योजना के तहत मुख्यधारा से जुड़कर अपने जीवन को बेहतर दिशा दें। जो भी व्यक्ति हिंसा छोड़कर समर्पण करेगा, उसे सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और पुनर्वास का पूरा अवसर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य हर उस व्यक्ति को सुरक्षित भविष्य देना है जो विकास और शांति की राह पर चलना चाहता है। यह बात मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट पुलिस लाईन परिसर में आयोजित पुनर्वास से पुर्नजीवन कार्यक्रम में कान्हा भोरमदेव जंगल क्षेत्र में सक्रिय 10 नक्सलियों के आत्‍मसमर्पण करने पर कहीं ।

उल्‍लेखनीय है कि इन नक्‍सलियों पर मध्‍यप्रदेश, छत्‍तीसगढ़ एवं महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा 2 करोड़ 36 लाख का ईनाम रखा गया था। इन नक्‍सलियों ने मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के समक्ष अपने हथियार देकर आत्मसमर्पण किया। इसके बाद सभी नक्‍सलियों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय संविधान की प्रति देते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने, समाज में लौटने और संविधान के मार्ग को अपनाने की बात कही।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा आज बालाघाट की धरती पर एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला है। हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटना साहस और संकल्प का प्रतीक है। प्रदेश सरकार हर उस व्यक्ति का स्वागत करती है जो हथियार छोड़कर विकास और शांति का मार्ग चुनता है। नक्सलवाद एक बाधा नहीं, बल्कि चुनौती है, और हम सभी मिलकर इसे समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को बधाई देता हूँ, जिन्होंने संयम, धैर्य और रणनीति के साथ काम करते हुए प्रदेश को नक्सल-मुक्त दिशा में आगे बढ़ाया l

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मध्यप्रदेश पुलिस के साहस, पराक्रम से प्रदेश में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत पुनर्वास और समर्पण नीति का असर लगातार दिखाई देने लगा है। हाल ही में मलाजखंड दलम की सुनीता ने हथियार त्यागकर शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया था, जिसके बाद अब यह क्रम और तेज हो गया है।आज भी दस सदस्यीय नक्सली दल ने भी हथियार डालकर सरकार की पुनर्वास योजना के अंतर्गत आत्मसमर्पण का निर्णय लिया l

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को राष्ट्रवाद, विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एकल सुविधा केंद्र के माध्यम से रोजगार व कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल युवाओं को हिंसा छोड़कर विकास की धारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। दूरस्थ वनांचलों में सुरक्षा बलों की पहुँच बढ़ाने के लिए नवीन अस्थायी कैंप स्थापित किए गए, जिनसे नक्सल गतिविधियों पर बड़ा अंकुश लगा है। विशेष रूप से हॉक फोर्स, पुलिस बल, कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय होकर नक्सली नेटवर्क को कमजोर किया। नक्सल विरोधी अभियानों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सरकार द्वारा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जा रहा है। यह कदम सुरक्षा बलों के मनोबल को और मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा इंस्पेक्टर शहीद आशीष शर्मा का बलिदान आज सार्थक हो गया है। नक्सल उन्मूलन के लिए उनका दिया गया बलिदान कर्तव्य के प्रति परम समर्पण को दर्शाता है।

इन नक्सलियों ने किया आत्म समर्पण

पुनर्वास से पुनर्जीवन के तहत नक्सलियों ने हथियार छोड़कर शांति और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है जिसमे लाल सिंह मरावी, विक्रम उर्फ हिडमा, समर उर्फ समरू, शिल्पा, जयशीला, सलिता उर्फ सविता, नवीन उर्फ हिडमा, जरीमा, राकेश होड़ी, सुरेंद्र उर्फ कबीर है। इन सभी पर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ सरकारों द्वारा कुल 2 करोड़ 36 लाख रुपये का ईनाम घोषित था।

मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने इस अवसर पर बताया कि देश में आजादी के बाद सबसे बडी अंतरिक समस्या नक्सलवाद थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश में हाक फोर्स के बल में वृद्धि की गई। एंटी नक्सल अभियान के अंतर्गत नक्सल क्षेत्र में नये कैंप लगाये गये और इस अभियान को गति प्रदान की गई। 64 पुलिस अधिकारियों को आऊट आफ टर्न प्रमोशन दिया गया। नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में जुड़ने का अवसर दिया गया। नक्सल मुडभेड़ में शहीद जवान आशीष शर्मा के परिवार को 01 करोड़ रुपये की राशि दी गई है और उसके भाई को डीएसपी बनाया गया है। जिसके फलस्वरूप कान्हा-भोरमदेव डिविजन के 10 नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण किया है।

पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने इस अवसर पर बालाघाट जिले में नक्सल उन्मूलन के लिए चलाये गये अभियान की जानकारी दी और बताया कि बालाघाट जिले में वर्ष 1980 से यह लड़ाई शुरू हुई थी। नक्सल उन्मूलन अभियान के अंतर्गत जिले में नवाचार किये गये। एकल सुविधा केन्द्र खोले गये और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया। हाकफोर्स, सीआरपीएफ एवं जिला पुलिस बल के दबाव के कारण पिछले दो माह में 02 करोड़ 81 हजार 500 रुपये के ईनामी 11 नक्सलियों ने आत्म समर्पण किया है। सरकार ने जनवरी 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य रखा है, लेकिन बालाघाट जिले में इस लक्ष्‍य को समय सीमा से पहले हासिल कर लिया गया है।

इस अवसर पर स्‍कूल शिक्षा एवं परिवहन व जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, कटंगी विधायक गौरव पारधी, वारासिवनी विधायक विवेक पटेल, अन्‍य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्‍य श्रीमती मौसम बिसेन, जिला पंचायत अध्‍यक्ष सम्राट सिंह सरस्‍वार, नगर पालिका अध्‍यक्ष श्रीमती भारती ठाकुर सहित अन्‍य जनप्रतिनिधि, आईजी बालाघाट संजय कुमार सिंह, आईजी सीआरपीएफ नीतू सिंह, कलेक्‍टर मृणाल मीना सहित पुलिस विभाग का अमला मौजूद था।

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