नई दिल्ली, 04 दिसंबर, 2025: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा कई अहम सवालों और बड़ी उम्मीदों के बीच शुरू हुआ है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत रहे हैं, लेकिन इस यात्रा में आर्थिक संतुलन, व्यापार समझौते और ऊर्जा साझेदारी सबसे बड़ी प्राथमिकता मानी जा रही है। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस भारत से अधिक सामान खरीदना चाहता है ताकि व्यापार का संतुलन सुधर सके।
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शिखर सम्मेलन में किसी बड़े रक्षा समझौते की घोषणा की संभावना कम है। हालांकि, नेताओं के बीच एसयू-57 फाइटर जेट और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी डिलीवरी जैसे महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। एसआईपीआरआई के अनुसार, आज भी भारत का 36% रक्षा आयात रूस से होता है।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया, जिससे तेल आयात 52 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। भारत ने रिकॉर्ड 4.7 मिलियन टन खाद का आयात भी रूस से किया है। हालांकि, ₹68.7 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार में भारत का निर्यात सिर्फ ₹4.9 अरब डॉलर है। भारत इस असंतुलन को कम करने के लिए IT, दवाइयां और कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाना चाहता है, जिसके लिए FTA पर बातचीत जारी है।

