जबलपुर: मंच पर हल्की रोशनी, मृदंग की पहली थाप और नर्तक–नर्तकियों के प्रवेश के साथ ही दर्शकों का ध्यान एकदम से मंच पर थिर हो गया। सभागार में संस्कृति और कला का अनोखा वातावरण बन चुका था। ओडिसी नृत्य की सुर–लय और भाव–मुद्राओं ने उपस्थित जनों को ऐसा बांधा कि कार्यक्रम के दौरान हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। अवसर था मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल के अंतर्गत संचालित भोजपुरी साहित्य अकादमी द्वारा जिला प्रशासन और शासकीय ललित कला महाविद्यालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक व सांस्कृतिक समारोह के समापन अवसर का।
ओडिसी नृत्य की अनुपम प्रस्तुति
समारोह के दूसरे दिन कोलकाता की प्रसिद्ध नृत्यांगना मोनालिसा घोष और उनके साथी कलाकारों ने ओडिसी नृत्य की अविस्मरणीय प्रस्तुति दी। महिंदर मिसिर, विद्यापति और भिखारी ठाकुर की रचनाओं पर आधारित कोरियोग्राफी ने दर्शकों को रस, भाव और भक्ति के अद्भुत संसार में ले जाकर खड़ा कर दिया।
प्रस्तुतियों की लय, गतियाँ और भावाभिव्यक्तियाँ इतनी सशक्त थीं कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर मंच से बंधे रहे।
विद्यापति साहित्य पर प्रभावी प्रस्तुति
मंच से ओम प्रकाश भारती ने विद्यापति के जीवन, साहित्य और उनके छंदों की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला। उनके वक्तव्य के बाद प्रस्तुत नृत्य–नाट्य ने मानो विद्यापति की रचनाओं को दृश्य रूप दे दिया। ओडिसी नृत्य के माध्यम से साहित्यिक भावों की प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी।
अकादमी–महाविद्यालय का संयुक्त सफल आयोजन
डॉ. पूजा शुक्ला, निदेशक, भोजपुरी साहित्य अकादमी एवं प्राचार्य, शासकीय ललित कला महाविद्यालय के निर्देशन में आयोजन का समग्र संयोजन हुआ। डॉ. मनीष कोष्टा, प्रशासनिक अधिकारी, सहित महाविद्यालय के शिक्षक–कर्मचारी पूरी तन्मयता से कार्यक्रम में जुटे रहे। भोपाल की कमल भण्डारी ने मंच संचालन को सहज बनाए रखा। महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने कार्यक्रम से साहित्य, संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा का अनुभव करते हुए भरपूर आनंद लिया।
इनका कहना है
प्रस्तुतियाँ इतनी प्रभावशाली थीं कि लगा जैसे भिखारी ठाकुर और विद्यापति की रचनाएँ हमारे सामने जीवंत हो गई हों। मोनालिसा घोष का नृत्य अद्भुत था।
हिमांशु राय, दर्शक
ओडिसी नृत्य की गरिमा और सौंदर्य को आज सजीव रूप में देखा। कलाकारों की मेहनत और भाव–नियंत्रण ने मन मोह लिया।
बांके बिहारी, दर्शक
