इंदौर: शासकीय, अशासकीय एवं निजी कार्यालयों में 10 या अधिक कर्मचारी पदस्थ हों, वहाँ आंतरिक समिति का गठन अनिवार्य है. साथ ही समिति का गठन नहीं होने पर संबंधित संस्था पर 50,000 रुपए दंड का प्रावधान है.यह जानकारी राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष विजया रहाटकर ने महिला एवं बाल विकास की कार्यशाला में बताई. आज एआईसीटीएसएल सभाकक्ष में कार्य स्थल पर महिला यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 को लेकर कार्य शाला का आयोजन किया गया.
कार्यशाला में महिला आयोग अध्यक्ष रहाटकर ने कहा कि अधिनियम में महिलाओं के साथ उत्पीड़न में रोकथाम, निषेध और निवारण हेतु स्थानीय और आतंरिक समिति का गठन अनिवार्य है. कार्यशाला के दौरान विजया रहाटकर द्वारा पी ओ एस एच अधिनियम 2013 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई. उन्होंने बताया कि जिन कार्यालयों में 10 से अधिक पुरुष कर्मचारी भी हों, वहां पर समिति गठन अनिवार्य है.
साथ ही असंगठित क्षेत्र की महिलाएं भी अपनी शिकायत स्थानीय समिति के समक्ष दर्ज करा सकती हैं. उक्त कार्यशाला में इंदौर संभाग के सभी जिलों की स्थानीय एवं आंतरिक समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य कार्यशाला में उपस्थित थे। कार्यशाला के शुरू में महिला एवं बाल विकास विभाग अधिकारी रजनीश सिन्हा ने अध्यक्ष रहाटकर तथा सुश्री कनिका का स्वागत किया ।अंत में सहायक संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग मधुमति धुलधौये ने आभार व्यक्त किया.
गोपनीयत बनाए रखना जरूरी
उन्होंने कहा कि आंतरिक अथवा स्थानीय समिति के समक्ष प्रस्तुत शिकायतों में शिकायतकर्ता एवं प्रतिवादी दोनों की गोपनीयता बनाए रखना भी जरूरी है. ऐसा नहीं करने पर समिति पर भी 50,000 रुपए तक के दंड का प्रावधान है. महिला अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार, समितियों की नियमित बैठकें बुलाने तथा कार्यस्थल पर महिलाओं हेतु सरल एवं सुरक्षित वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया गया.
