जबलपुर: जिले में रबी फसलों गेहूं, मटर, चना और मसूर की बोनी तेजी से जारी है। हालांकि इसके साथ ही धान कटाई के बाद खेतों में बची पराली जलाने की घटनाएँ भी चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। हार्वेस्टर से कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों को आग लगाने की प्रवृत्ति से मिट्टी की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है और पर्यावरण पर भी भारी दुष्प्रभाव पड़ रहा है।
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में बीते दो सप्ताह में पराली जलाने की कुल 1759 घटनाएँ सैटेलाइट मॉनिटरिंग के माध्यम से दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने पराली जलाने पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इसके उल्लंघन पर किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
2500 से 15 हजार तक लगेगा जुर्माना
जिला प्रशासन ने पराली जलाने पर जुर्माना राशि निर्धारित की है, जिसमें दो एकड़ तक 2500 रुपए, दो से पाँच एकड़ तक 5000 रूपए, पाँच एकड़ से अधिक 15,000 रुपए तक का जुर्माना लगेगा।
इसके साथ ही जिले में पराली जलाने पर प्रभावी नियंत्रण के लिए त्रि-स्तरीय निगरानी समिति भी बनाई गई है।
मृदा और पर्यावरण पर बड़ा खतरा
उप संचालक कृषि के अनुसार पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता तेजी से कम होती है। इसके अलावा, पराली का धुआँ वातावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित करता है, जिससे क्षेत्र का तापमान बढ़ रहा है और हरित वातावरण को नुकसान पहुँच रहा है। खेतों की मेढ़ों पर लगे पेड़-पौधे तथा उपयोगी कीट भी इस प्रक्रिया से नष्ट हो जाते हैं।
कृषि विभाग किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करने की सलाह दे रहा है। इसके अतिरिक्त, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और स्मार्ट सीडर की मदद से बिना खेत तैयार किए सीधे बुवाई संभव है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।
