इंदौर : शहर में राज्य सरकार के द्वारा बनाई जा रही मेट्रो रेल योजना आने वाले समय में दूसरा बीआरटीएस साबित होगीं। इस समय शहर को मेट्रो रेल की आवश्यकता नहीं है। मेट्रो रेल योजना पर जितनी राशि खर्च की जा रही है, उससे शहर में 6 सौ से ज्यादा फ्लाईओवर , एलिवेटेड ब्रिज और पुल – पुलिया का निर्माण किया जा सकता है। इससे आने वाले 100 सालों तक शहर की यातायात व्यवस्था सुधर सकती है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने आज पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि इंदौर मेट्रो रेल योजना एक अनाथ बच्चा बन गई है। वह एक ऐसा बच्चा है जिसका की ना कोई मां है, ना कोई बाप है। कितने आश्चर्य की बात है कि पिछले दिनों प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय लव कुश चौराहे पर प्रोजेक्ट को देखने के लिए पहुंचे, तब उन्हें मालूम पड़ा कि इस प्रोजेक्ट में बनाए जा रहे स्टेशन पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। आवश्यकता तो इस बात की है कि मेट्रो रेल को शहर के बाहरी क्षेत्र से निकालकर एक कोने को दूसरे कोने से जोड़ने का काम किया जाए।
चौकसे ने कहा कि मेट्रो रेल योजना का काम अभी जिस तरह से किया जा रहा है , उससे आने वाले समय में यह दूसरा बीआरटीएस साबित होगा। इस प्रोजेक्ट की लागत 7500 करोड़ रुपए थीं, जो बढ़कर 12000 करोड़ रुपए हो गई है। राज्य सरकार द्वारा उक्त राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। उक्त 12 हजार करोड़ रुपए की राशि यदि इंदौर के विकास पर खर्च कर दी जाए तो इंदौर का चेहरा बदल सकता है।
