केरल की कंपनी को हाईकोर्ट से राहत, दस लाख की वसूली पर रोक

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट से मेसर्स थारू एण्ड संस एर्नाकुलम केरल की कंपनी है को राहत मिली है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने फर्म से दस लाख चौबीस हजार पांच सौ चालीस रुपए की वसूली के वरिष्ठ यांत्रिक इंजीनियर (कोचिंग) पश्चिम मध्य रेलवे के आदेश पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है।याचिकाकर्ता कंपनी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनकी कंपनी ने ट्रेन में वातानुकूलित कोच में कंबल, चादर इत्यादि का वितरण का ठेका लिया था। उनकी फर्म के कर्मचारी उक्त श्रेणी के यात्रियों को उक्त सामान यात्रा के दौरान प्रदान करते है।

याचिकाकर्ता ने 2019 में रेलवे के साथ इस आशय का एक समझौता किया था, जिसकी कार्यावधि 5 नवंबर 2019 से 03 नवंबर 21 तक थी। अर्थात लगभग 2 वर्ष (730) दिन के लिए ठेका हुआ था, 28 मार्च 2022 को ठेके की शर्तों के अनुसार याचिकाकर्ता ने उक्त कंबल, चादर इत्यादि का कार्य सफलतापूर्वक किया एवं रेलवे ने भी उनकी कार्यशैली पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया। 10 जुलाई 2023 को कपिल ताम्रकार नामक व्यक्ति ने एक दावा रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल भोपाल के समक्ष प्रस्तुत किया।

जिसमें उसने महाप्रबंधक पश्चिम मध्य को उत्तरवादी बनाया एवं आठ लाख रुपये का मुआवजा ब्याज सहित मांगा। आवेदक की ओर से कहा गया कि उक्त मामले में कपिल ताम्रकार का तर्क था कि प्राइवेट नौकरी के तौर पर रेलवे के एसी अटेंडेंट के रूप में कार्य कर करते हुए, उसके पास 18 जून 22 से 27 जून 22 तक की ट्रेवलिंग अथॉरिटी थी, कार्य के दौरान 22 जुलाई 2022 को हजरत निजामुद्दीन से जबलपुर की गाड़ी नंबर 22182 के एसी कोच एच-1 में नियुक्त था। इस दौरान कोच की एक बुर्जुग महिला ने की उसकी तबीयत खराब है, कहते हुए उससे चाय लाने का अनुरोध किया, मानवता के नाते वह उसके लिए चाय लेने गया, लौटते वक्त अचानक जब वह चढ ही रहा था ट्रेन चल दी और वह नीचे गिर गया। जिससे उसके बायें पैर अंगूठा और तीन उंगली कट गई। पूरे शरीर में मूदी चोट आयी और स्थाई तौर पर घायल हो गया।

ट्रिब्यूनल ने रेलवे को ठहराया था जिम्मेदार
उक्त आधार पर उसने रेलवे से आठ लाख रुपये क्षतिपूर्ति की मांग की रेलवे ने उक्त प्रकरण के जवाब में कहा कि वह कोच अटेंडेंट था, इसलिये वह यात्री की परिभाषा में नहीं आता एवं थारू एण्ड कंपनी इसके लिये जिम्मेदार है। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल भोपाल ने अपने आदेश में कहा कि उक्त घटना के लिये थारू कंपनी जिम्मेदार नहीं है, रेल्वे ही इसके लिये जिम्मेदार है। 2 जुलाई 2025 को ट्रिब्यूनल ने निर्णय देते हुए आठ लाख की राशि मय ब्याज के रेलवे को जिम्मेदार मानते हुए उक्त कपिल ताम्रकार को देने का निर्देश दिया था।

रेलवे ने कंपनी से शुरु कर दी कटौती
उक्त आदेश उपरांत रेल्वे ने कोई अपील नहीं की एवं याचिकाकर्ता को एक नोटिस 26 सितंबर 25 को यह कहते हुए दिया कि वह ठेके की शर्तों के उल्लंघन का दोषी है एवं रेलवे, दुर्घटना अनापेक्षित घटना प्रतिकर्ष संशोधन नियम के तहत उक्त राशि का भुगतान करें, अन्यथा उसके आगामी बिल से उक्त राशि काट ली जाएगी। सुनवाई पश्चात न्यायालय ने कहा कि रेल्वे यह सिद्ध करने में असफल है कि याचिकाकर्ता किस प्रकार से दोषी है। जिसके बाद न्यायालय ने वसूली की कार्रवाई पर आगामी सुनवाई तक रोक लगाते हुए दो सप्ताह में समस्त रिकार्ड पेश करने के निर्देश दिये।

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