दक्षिण चीन सागर में चीन का 78,000 टन का ‘समंदर का शाकाल’ प्लेटफार्म, न्यूक्लियर-सेफ फ्लोटिंग आइलैंड पर पड़ोसी देशों में गहरा तनाव

नई दिल्ली, 22 नवंबर, 2025: चीन ने दक्षिण चीन सागर में एक बेहद उन्नत और रहस्यमय फ्लोटिंग आर्टिफिशियल आइलैंड बनाना शुरू कर दिया है। 78,000 टन वजन वाला यह स्टील-आर्मर प्लेटफार्म न्यूक्लियर हमले तक झेलने की क्षमता रखता है। इसे ‘समंदर का शाकाल’ कहा जा रहा है, जो चीन को समुद्र में लगभग अभेद सैन्य ताकत प्रदान करेगा। यह ढाँचा लगातार चार महीनों तक 238 लोगों के रहने लायक है और इसे किसी भी समुद्री जगह पर तैनात किया जा सकेगा। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2028 तक पूरा होना है।

क्षेत्रीय संतुलन को बदलने की बड़ी चाल

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह तैरता आइलैंड तकनीक, रणनीति और ताकत का अनोखा मिश्रण है। यह केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि बीजिंग का चलता-फिरता दावा है, जो पूरे समुद्री संतुलन को प्रभावित कर सकता है। वियतनाम, फिलिपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे पड़ोसी देश चीन की इस बढ़ती आक्रामकता से गहरी चिंता में हैं। इस प्लेटफॉर्म से चीन को यह सुविधा मिलेगी कि वह इसे विवादित समुद्री क्षेत्रों और वियतनाम के आर्थिक समुद्री क्षेत्र (EEZ) के बेहद करीब तक ले जा सके, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा।

वैश्विक व्यापारिक मार्ग पर सैन्य ताकत

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म समुद्र में लंबी दूरी तक मिशन चला सकेगा और इसमें आधुनिक कमांड सेंटर, रडार सिस्टम और एंटी-मिसाइल शील्ड लगाई गई है। यह निर्माण चीन की उस रणनीति का हिस्सा है, जहाँ वह अंतर्राष्ट्रीय कानून को नजरअंदाज करते हुए समुद्र में वास्तविक नियंत्रण स्थापित करने में जुटा है। यदि चीन ऐसे कई फ्लोटिंग आइलैंड तैनात करता है, तो दक्षिण चीन सागर एक स्थायी तनाव क्षेत्र बन सकता है, जहाँ क्वाड (QUAD) देशों सहित क्षेत्रीय शक्तियों का ध्यान केंद्रित हो रहा है।

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