मनरेगा में 26 करोड़ से अधिक पंजीकृत श्रमिक

नयी दिल्ली 21 नवंबर (वार्ता) सरकार ने कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रयासरत जारी है और अब तक इसमें में 26 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि मनरेगा के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रयासरत किया जा रहा है ताकि ग्रामीण परिवार इस अधिनियम के प्रावधानों का लाभ प्राप्त कर सकें। मनरेगा का दायरा बहुत बड़ा है। इसमें देश भर के 2.69 लाख ग्राम पंचायतों में 26 करोड़ से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं।

मंत्रालय ने कहा कि अधिनियम के अनुसूची-II के पैरा 2 के अनुसार “ग्राम पंचायत का यह कर्तव्य होगा कि वह आवश्यक जांच के बाद आवेदन प्राप्त होने की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर एक जॉब कार्ड जारी करे। इसमें एक विशिष्ट जॉब कार्ड नंबर, पंजीकरण संख्या, बीमा पॉलिसी संख्या और आधार संख्या (यदि उपलब्ध हो) का उल्लेख हो।”इसके अलावा अनुसूची-II के पैरा 3 में कहा गया है कि “जॉब कार्ड का नवीनीकरण प्रत्येक पाँच वर्ष बाद सत्यापन के उपरांत किया जाएगा।” जॉब कार्ड से संबंधित गतिविधियाँ जैसे जारी करना, सत्यापन और नवीनीकरण राज्य सरकारों की जिम्मेदारी हैं। इन्हें ग्राम पंचायत जैसी पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से पूरा किया जाता है।

मंत्रालय ने कहा कि इन वैधानिक प्रक्रियाओं को सरल और समर्थ बनाने हेतु राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि वे राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) ऐप में उपलब्ध ई-केवाईसी सुविधा का उपयोग जॉब कार्ड सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया के बाद नवीनीकरण के लिए करें। यह सुविधा राज्यों को समयबद्ध, पारदर्शी और कुशल तरीके से सत्यापन पूरा करने में मदद करेगी। चूँकि 99.67 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों के आधार पहले से ही जोड़े जा चुके हैं इसलिए ई-केवाईसी जॉब कार्ड सत्यापन का सरल, विश्वसनीय, सटीक और प्रभावी तरीका हो सकता है।

राज्यों को निर्देश दिया गया है कि नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी समस्याएँ दूर कर प्रक्रिया को यथासंभव सुगम बनाया जाए। यह एक प्रगतिशील कदम है जिसका उद्देश्य मनरेगा में पारदर्शिता, दक्षता और सेवा प्रदान में आसानी को बढ़ाना है। राज्यों और जमीनी स्तर के कार्मिकों को प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाने हेतु पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित व संवेदनशील बनाया गया है। अभी तक राज्यों ने 56 प्रतिशत से अधिक सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी पूरा कर लिया है।

मंत्रालय ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे और प्रत्येक वास्तविक श्रमिक के अधिकार सुरक्षित रहें और उन्हें बिना किसी व्यवधान के अधिनियम के अंतर्गत अपनी वैधानिक मजदूरी-रोज़गार प्राप्त होता रहे।

 

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