
बालाघाट। मलाजखंड ताम्र परियोजना में 11 नवंबर को बस हादसे में घायल हुए मजदूर मंगलेश यादव की मौत तीन दिन पहले ही हो चुकी थी, लेकिन परिजनों को इसकी जानकारी 19 नवंबर को दी गई। मौत की सूचना दबाने के आरोपों से आक्रोशित ग्रामीणों ने परियोजना के मुख्य द्वार पर 20 घंटे तक चक्काजाम कर दिया। बस ब्रेक फेल होने के बाद 500–700 मीटर घिसटकर पलट गई थी, जिससे 27 मजदूर घायल हुए थे। गंभीर रूप से घायल दोनों मजदूरों की मौत परिजनों से छिपाने का आरोप प्रबंधन पर लगा है।
मौत की खबर भीड़ी और आसपास के गांवों में पहुंचते ही ग्रामीण दोपहर 3 बजे से ही परियोजना गेट पर जमा होने लगे। शाम को रायपुर से मंगलेश का शव पहुंचते ही विरोध और बढ़ गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने शव को गेट पर रखकर चक्काजाम किया।
इस दौरान खान में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि 1.5 किमी नीचे तक कोई सुविधा नहीं, पीने का पानी नहीं, फर्स्ट एड बॉक्स तक मौजूद नहीं है। मजदूरों ने यह भी कहा कि दुर्घटना वाली बस भी सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरती थी और प्रबंधन ने DGMS टीम की जांच पूरी होने तक मौत की सूचना छिपाई।
स्थिति बिगड़ने पर एसडीएम अर्पित गुप्ता और एसडीओपी अरविंद शाह पहुंचे और तीन दौर की वार्ता हुई, लेकिन तीनों वार्ताएँ विफल रहीं। कड़ाके की ठंड में भी जनप्रतिनिधि ग्रामीणो संग पूरी रात सड़क पर डटे रहे।
सुबह करीब 4 बजे प्रशासन ने जाम खुलवाकर यातायात शुरू करवाया, लेकिन ग्रामीण सुबह 10 बजे तक शव को गेट पर रखकर प्रदर्शन करते रहे।
