वियना/तेहरान, 20 नवंबर (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था ने आज चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जून में हुए हमलों में क्षतिग्रस्त ईरानी प्रतिष्ठानों तक उसकी अभी भी महत्वपूर्ण पहुंच नहीं है और तेहरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार के सत्यापन को बहुत देर हो चुकी है।
वियना में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को संबोधित करते हुए महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने बुधवार को कहा कि एजेंसी को ईरान के निम्न और उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार की तत्काल जांच करने की आवश्यकता है, जिसे निरीक्षक पिछले पांच महीनों से सत्यापित नहीं कर पाए हैं।
श्री ग्रॉसी ने कहा कि सितंबर में काहिरा में निरीक्षण पर सहमति होने के बाद वे ईरानी अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में हैं अगर समझौते का पूरी तरह से लागू करना है तो और ज्यादा रचनात्मक सहयोग की आवश्यकता है।
उनकी यह टिप्पणी अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन द्वारा समन्वित प्रयास के साथ मेल खाती है जिन्होंने संयुक्त रूप से एक मसौदा प्रस्ताव में मांग किया है कि ईरान आईएईए के साथ अपना पूर्ण सहयोग फिर से शुरू करे तथा निरीक्षकों को अप्रतिबंधित पहुंच प्रदान करे।हालांकि तेहरान ने चेतावनी दी है कि इस तरह के प्रस्ताव से आईएईए निदेशक के साथ सितंबर में हुई सहमति खतरे में पड़ जाएगी।
इस सप्ताह की शुरुआत में, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़म ग़रीबाबादी ने पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कहा था कि उनके कार्यों से समझौते को नुकसान पहुंच सकता है। ईरानी अधिकारियों ने इस रुकावट को सितंबर के आखिर में स्नैपबैक मैकेनिज़्म के तहत संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के फिर से लागू होने पर जोर दिया।
आंशिक रूप से सार्वजनिक की गई आईएईए रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अभी भी निरीक्षकों को जून में 12 दिनों के संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिकी हमलों में क्षतिग्रस्त हुए परमाणु स्थलों का दौरा करने की अनुमति नहीं दी है, जब निरीक्षकों ने आखिरी बार 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 440 किलोग्राम यूरेनियम का सत्यापन किया था।
श्री ग्रॉसी ने कहा कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार की वर्तमान स्थिति को स्थापित करने के लिए तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है और चेतावनी दी कि निगरानी में लंबे समय तक अंतराल सुरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है।
आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स आगामी दिनों में इस पर विचार-विमर्श जारी रखेगा क्योंकि पश्चिमी देश तेहरान पर पूर्ण अनुपालन बहाल करने के लिए दबाव डाल रही हैं जबकि ईरान का कहना है कि प्रतिबंधों एवं सुरक्षा चिंताओं का भी समाधान किया जाना चाहिए।

