मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण में आधार वैकल्पिक क्यों…?

इंदौर: शहर में चुनाव आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम चल रहा है. उक्त विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाताओं को सन 2003 की जानकारी भरने के फार्म बांटे जा रहे हैं. कई जगह मतदाताओं को फार्म बंट भी गए है.राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश को अन्य राज्यों के साथ मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में शामिल किया है. इसके तहत मतदाता को 2003 के पहले की विधानसभा क्रमांक, भाग संख्या और वोटर नंबर के साथ माता के नाम की जानकारी भरना है. इसमें पिता की जानकारी नहीं चलेगी, वो मतदाता सूची में आपके नाम के आगे लिखा होना पाया गया है, ऐसा आयोग का मानना है.

शहर में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलाया जाएगा. यह बात अलग है कि इंदौर की 9 विधानसभा में करीब 25 लाख से ज्यादा मतदाताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण के फार्म ही नहीं बांटे जा सके है. इसका कारण है कि आयोग की प्रिंटिंग प्रेस में पूरे फार्म छपे ही नहीं है. वहीं अधिकारियों और चुनाव आयोग द्वारा बीएलओ को भारी दबाव बनाया जा रहा है कि वे फार्म भरकर जल्दी जमा करें.

वास्तविकता यह है कि मतदाता को उक्त मामले के जानकारी मिलने के बाद वह स्वयं मतदाता सूची में नाम नहीं कटने के डर से खुद फार्म मांगने लगा है या फिर खुद किसी अन्य से फार्म की फोटोकॉपी करवा रहा है. आश्चर्य जनक बात यह है कि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण फार्म में आधार संख्या को वैकल्पिक दर्शाया गया है. वहीं रिश्तेदार, माता या पिता इपिक नंबर मांगा गया है. उसमें भी दिक्कत और परेशानी यह है कि वोटर आईडी और मतदाता सूची (जिसमें एपिक नंबर का उल्लेख) में अलग है. इसी स्थिति में स्पष्ट नहीं है कि मतदाता का नाम वोटर आईडी होने पर जुड़ा रहेगा या कट जाएगा?
   मतदाताओं को 2003 के पहले की जानकारी में भारी परेशानी
मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बीएलओ द्वारा चुनाव आयोग से दिए गए फार्म में 2003 में कौन सी विधानसभा, कौन सा मोहल्ला या कॉलोनी, भाग संख्या, वोटर नंबर मतदाताओं से मांगा जा रहा है. याद रहे कि 2003 के बाद चार विधानसभा चुनाव हो चुके है. इतने ही नगर पालिका और लोकसभा के चुनाव भी हो गए है. उक्त सभी चुनावों में मतदाता अपने मत का उपयोग भी कर चुके हैं. इसके बावजूद उससे 2003 का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है.

वेबसाइट लिंक अपडेट नहीं
आयोग द्वारा वेब साइट लिंक दी गई है, जो अपडेट नहीं होने के साथ अधूरी भी है. उदाहरण के लिए विधानसभा 4 की एक कॉलोनी भाग संख्या 141 है और उसमें मकान 133 तक ही जानकारी है. खास बात यह है कि उक्त कॉलोनी की दो भाग संख्या और कॉलोनी करीब 260 प्लॉट है. उपरोक्त भाग संख्या में आगे के मकानों के नंबर है ही नहीं. दूसरी जानकारी अधूरी यह है कि मकान मालिक की जगह दूसरे लोगों के नाम मतदाता के रूप में अंकित नजर आ रहे है. मतलब यह है कि कालोनी का नाम सही पर मतदाता के नाम कहीं और के है. उससे भी बढ़कर यह है कि वेब साइट लिंक पर कॉलोनी की भाग संख्या ही गलत है. जब भाग संख्या ही गलत आयोग की वेब साइट पर गलत है तो मतदाता अपनी सही जानकारी कहां से लेगा? ऐसे में मतदाता को जानकारी कौन देगा और कहां से मिलेगी? यह सवाल खड़े हो रहे है, मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण में.

इन सभी विभागों में आधार अनिवार्य और केवाईसी भी
चुनाव आयोग मतदाता सूची में आधार कार्ड को अनिवार्य नहीं मान रहा है. वहीं आयकर रिटर्न, गैस कनेक्शन, राजस्व और रजिस्ट्री, जन्म-मृत्यु, जीएसटी रिटर्न, बिजली कनेक्शन, पासपोर्ट, बैंक गारंटी और बैंक अकाउंट, बैंक लोन, डायवर्शन टैक्स में केवाईसी, राशनकार्ड को आधार से जोड़ने पर राशन दिया जाता है.
उपरोक्त सभी विभागों और कार्यों के लिए आधार कार्ड ज़रूरी है तो फिर मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण में आयोग द्वारा आधार कार्ड वैकल्पिक रखने का औचित्य क्या हो सकता है? इसमें केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभाग में आधार कार्ड ज़रूरी है.

भारत में नागरिकता का प्रमाण पत्र है आधार कार्ड
कई देशों में यूनिक आईडी लागू होने के जानकारी मिली थी. इसको देखते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लागू करने की योजना बनाई थी. उक्त योजना को अमलीजामा पहले चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने पहनाया था और आधार कार्ड लागू किया था. आधार कार्ड का पूरा नाम यूनिक आइडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया है, जिसको यूआईडीएआई भी कहते है. यह भारत में 2009 में 12 डिजिट यानी नंबर का बनाया गया है और 2010 में लागू किया गया था. भारतीय नागरिक होने का प्रमाण है आधार कार्ड. भारत के अलावा आधार कार्ड यानि यूआईडी कार्ड अमेरिका, फ्रांस, स्वीटजरलैंड, यूएई  जैसे कई देशों में लागू है. खास बात यह है कि सन 2022 में फ्रांस ने यूआईडी को अनिवार्य कर दिया. यूआईडी के बिना फ्रांस की नागरिकता नहीं मानी जाएगी.

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