
नई दिल्ली, 08 नवम्बर: देश के दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) में एक सबसे बड़ा संशोधन देखने को मिल सकता है। इसे 25 नवंबर, 2025 से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में पेश करने की तैयारी है। इस प्रस्तावित विधेयक का केंद्र बिंदु सेक्शन 29A है, जो कंपनी के प्रमोटर या उसके ‘ब्लड रिलेशन’ को दिवालिया प्रक्रिया में भाग लेने से रोकता है।
सरकार ने सेक्शन 29A को गलत प्रबंधन से कंपनी डुबाने वाले लोगों को दोबारा नियंत्रण से रोकने के लिए लागू किया था। हालांकि, उद्योग जगत का मानना है कि यह प्रावधान अत्यधिक व्यापक है। इसकी वजह से ऐसे लोग भी दिवालिया प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं, जिनका कंपनी के वित्तीय निर्णयों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता, वे केवल पारिवारिक रिश्तों के कारण अयोग्य घोषित हो जाते हैं। स्टेकहोल्डर्स ने सिफारिश की है कि ‘रिलेटेड पार्टी’ की परिभाषा को केवल व्यावसायिक संबंधों तक सीमित किया जाए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी इसी बात का समर्थन करते हैं कि ‘रिलेटेड पार्टी’ का निर्धारण वास्तविक व्यावसायिक संबंधों के आधार पर होना चाहिए। यदि सरकार इस संशोधन को मंजूरी देती है, तो कई बड़े कॉरपोरेट हाउस अपने ‘ब्लड रिलेशन’ से जुड़ी कंपनियों के IBC मामलों में भाग ले सकेंगे। इससे दिवालिया कंपनियों के लिए समाधान प्रक्रिया में तेजी आ सकती है, संभावित निवेशकों की संख्या बढ़ेगी और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूती मिलेगी।
