
ग्वालियर। ग्वालियर के बड़ागांव क्षेत्र स्थित बिशप निवास में चल रहे धर्मातरण और 5 राज्यों के बच्चों को धर्मगुरु बनाने की खबर सामने आने के बाद ग्वालियर के हिन्दू एवं सनातनी संगठनों में गहन रोष व्याप्त है। हिन्दू संगठनों ने ग्वालियर में चल रहे धर्मांतरण के इस कथित अड्डे के खिलाफ तत्काल नियमोचित एवं न्यायोचित कार्रवाई एवं दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। हिन्दू संगठनों का कहना है कि इससे पहले ग्वालियर जिले में ही भितरवार में धर्मान्तरण और महाराजपुरा थाना क्षेत्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों का भी मामला सामने आ चुका है, तब भी प्रशासन ने सजगता नहीं बरती। बहरहाल, ग्वालियर जिला प्रशासन ने दो सदस्यो का जांच दल गठित कर दिया है।
हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयवीर भारद्वाज यह मामला सामने आने के बाद गुस्से में हैं। उन्होंने कहा कि अभी कुछ माह पूर्व ही ग्वालियर के भितरवार में खुलेआम धर्मान्तरण और सनातन के खिलाफ मंच से अपशब्द बोलने का मामला सामने आया था। सब कुछ खुलेआम होने के बावजूद आज तक इसको लेकर कोई कार्यवाही जिला प्रशासन ने नहीं की, इतना ही नहीं डबरा में भी ईसाई मिशनरीज से जुड़े स्कूल की करतूतें सामने आ चुकी हैं। बंग्लादेशी घुसपैठियों के पकड़े जाने और पुलिस को चकमा देकर भागने की घटनायें भी ग्वालियर में घटित हुई हैं। इन सबको लेकर हिन्दू महासभा सहित तमाम संगठन कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि ग्वालियर के बड़ेगांव में चोरी छिपे आदिवासी-गरीब बच्चों का कैंप लगाकर धर्मांतरण और 5 राज्यों के बच्चों को धर्मगुरु बनने की ट्रेनिंग देने का खुलासा होने के बाद माहौल गरमा गया है। इस खुलासे में सामने आया था कि ग्वालियर के बड़ागांव क्षेत्र स्थित बिशप निवास परिसर के एक सेंटर में 26 बच्चों को धार्मिक शिक्षा दी जा रही है, ये बच्चे मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों के अलावा ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और केरल से लाए गए बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह सेंटर ईसाई मिशनरी संगठन द्वारा संचालित है और बच्चों को धार्मिक अध्ययन के साथ आध्यात्मिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बताया गया है कि उन्हें आगे चलकर धर्मोपदेशक या रिलीजियश इंस्ट्रक्टर्स के रूप में तैयार करने की योजना है। सेंटर शहर से लगभग 8 किमी दूर है। धार्मिक अनुष्ठान और संस्कार शहर की मुख्य चर्चों के बजाय ग्रामीण इलाकों की चर्चा में आयोजित किए जा रहे हैं। धर्मांतरण कराने वाले संगठन का विशेष ध्यान आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों पर है। परिवारों को बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य का आश्वासन देकर उन्हें इस कार्यक्रम में जोड़ा जा रहा है।
इस जानकारी में यह भी बताया गया है कि बिशप निवास में बच्चों का ट्रेनिंग सेंटर है। बिशप के नेतृत्व में ही उनकी देखभाल व धार्मिक शिक्षा दी जाती है। हाल ही में डबरा स्थित चर्च में एक बच्चे का डीकन (धर्मगुरू) बनाने का धार्मिक संस्कार किया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि बिशप हाउस के पेड़ों से घिरी इमारत में बच्चों को छिपाकर रखा जाता है। वे केवल जरूरी होने पर बाहर निकलते हैं।
*ग्वालियर कलेक्टर ने गठित की जांच समिति, कहा “करेंगे कार्यवाही”*
यह सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद ग्वालियर जिला कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने मामले की जांच के लिए एडीएम, एसडीएम के नेतृत्व में जांच समिति गठित करके जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जांच में सच्चाई सामने आने के बाद तुरंत उचित कार्यवाही की जाएगी। यह पूछे जाने पर क्या ग्वालियर प्रशासन के पास इस तरह की किसी भी धार्मिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति सम्बन्धित कोई आवेदन बड़ागांव से आया है इसके जवाब में कलेक्टर रुचिका चौहान ने साफ इंकार किया कि उनके पास ऐसा कोई आवेदन नहीं आया।
*सामूहिक धर्मांतरण पर 10 साल तक की जेल*
बजरंग दल एवं विहिप के नेता पप्पू वर्मा कहते हैं कि मप्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के अनुसार धर्मांतारण के सामान्य मामलों में 1-5 साल जेल, महिलाओं, नाबालिगों या एससी-एसटी के मामले में 2-10 साल जेल और 50,000 जुर्माना, सामूहिक धर्मांतरण पर 5-10 साल जेल और 1 लाख रुपए जुर्माना एवं धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बड़ागांव में धर्मांतरण की मुहिम चलाने के पहले किसी प्रशासनिक अधिकारी से कोई अनुमति ली गई थी। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के इस पूरे मामले की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
