
नई दिल्ली, 05 नवम्बर 2025: अमेरिका ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जो 21 नवंबर से लागू होंगे। अमेरिका का यह कदम रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर कड़ा दबाव डालने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस कार्रवाई से भारत की ऊर्जा नीति पर भी प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल आयात करने वाला प्रमुख देश है और यूक्रेन संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दबाव बढ़ गया है।
प्रतिबंधों से पहले पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत के रिफाइनर, जिनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और नायरा एनर्जी जैसी प्रमुख कंपनियाँ शामिल हैं, अपनी खरीदी बढ़ा रहे हैं। अक्टूबर में भारत ने प्रतिदिन 16.2 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात किया। नायरा एनर्जी, जिसे रूस की रोसनेफ्ट का समर्थन प्राप्त है, उसने अक्टूबर में अपनी कच्चे तेल की पूरी आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। अब ये कंपनियाँ वैकल्पिक स्रोतों को भी तलाशने में जुट गई हैं।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सामर्थ्य को प्राथमिकता देती रहेगी। अधिकारियों ने कहा है कि रिफाइनर अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार कच्चे तेल के वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र हैं। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है, रूस से आपूर्ति में कमी आने पर इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे क्षेत्रों से तेल आयात बढ़ाने की योजना बना रहा है। अक्टूबर में भारत ने अमेरिकी कच्चे तेल का आयात तीन गुना बढ़ाकर 5,68,000 बैरल प्रति दिन कर लिया है।
