इंदौर: आजादी के बाद के इंदौर और आज के इंदौर में जमीन-आसमान का अंतर है. यातायात की मुख्य समस्या सबसे बड़ी चुनौती के रूप में दिखाई दे रही है. शहर के राजवाड़ा को केन्द्र मानकर यदि हम 5-6 किलोमीटर के दायरे में ही देखें तो जो दृश्य है, वह बहुत ही भयावह है. नागरिकों, बाजारों और वाहनों का घनत्व दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. एक तरफ चार पहिया वाहनों की अधिक बिक्री, वहीं यातायात विभाग की अनदेखी. ऐसी स्थिति में भविष्य को लेकर भी कोई योजना नहीं है. इससे शहर का बढ़ता यातायात अब लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहा है.
कुछ वर्ष पूर्व शहर के दो बड़े मुख्य मार्ग जवाहर मार्ग एवं एमजी रोड पर ही वाहनों की सर्वाधिक संख्या देखने को मिलती थी, लेकिन वर्ष 2015 के बाद से शहर के हर मार्ग पर अचानक यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है. इसमें प्रमुख रूप से दो और चार पहिया वाहनों की बढ़ती बिक्री मुख्य कारण प्रतीत होता है. हर वर्ष लाखों वाहनों के पंजीयन हो रहे हैं.
इसके साथ ही बढ़ते स्कूल-कॉलेज और इनके द्वारा संचालित बसों के अलावा शहर में चल रहे हजारों ई-रिक्शा ने भी शहर के हर क्षेत्र में जनता की समस्याएं बढ़ा दी हैं. सुबह दस बजे से लेकर रात्रि दस बजे तक सडक¸ों पर दो पहिया वाहन चलाना दूभर हो गया है. गतिहीन यातायात के कारण लोगों के सफर में दो-तीन गुना ज्यादा समय लग रहा है. एक जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में पौने दो लाख तो वर्ष 2024 के दिसंबर में करीब दो लाख वाहन आरटीओ में पंजीकृत किए गए थे. यदि इसी तरह वाहनों की संख्या बढ़ती रही तो आने वाले समय में शहर की सडक¸ों पर यातायात विस्फोटक हो सकता है.
यह बोले नागरिक…
जितने लोग हैं, उससे ज्यादा तो शहर में वाहन हो चुके हैं. इंदौर में जो वाहन पंजीकृत हैं, उसके अलावा बाहर से आकर यहां चलने वाले वाहन तो गिनती के बाहर ही हैं.
– किशन लाल
शहर में चार पहिया वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. हर तरफ कार ही कार नजर आती हैं. ऐसे में छोटे वाहनों के लिए सडक¸ कम पड़ जाती है. मामला चिंताजनक है. इसे गंभीरता से लेना चाहिए.
– सचिन सिलावट
सुबह दोपहर शाम को वाहनों के बीच दौड़ती स्कूल बसें तो यातायात को बाधित करती ही हैं, वहीं बड़े वाहनों की भी संख्या बढ़ रही है. आने वाले समय में यह समस्या और भी दुखदायी हो सकती है.
– शादाब खान
