इंदौर:शहर में बीआरटीएस की रेलिंग हटने के बाद अब यातायात सुधार और सडक़ सौंदर्यीकरण के कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू होने की तैयारी है. एलआईजी से नवलखा तक लगभग साढ़े सात किलोमीटर लंबे प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर का काम 15 फरवरी से शुरू किया जाना था, लेकिन हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई और तकनीकी बदलावों के कारण इसमें देरी संभव है.
रेलिंग हटने के बाद दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नगर निगम द्वारा नए सेंटर डिवाइडर बनाए जाएंगे.
इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और फरवरी अंत या मार्च की शुरुआत में काम तेज होने की संभावना है. शहर में प्रस्तावित अन्य पांच फ्लाईओवर जैसे शिवाजी वाटिका से जीपीओ और पलासिया से गीता भवन पर भी बीआरटीएस पूरी तरह हटने के बाद गति आएगी. प्रशासन का लक्ष्य है कि नई सडक़ व्यवस्था चौड़ीकरण और डिवाइडर निर्माण का कार्य छह माह में पूरा कर लिया जाए. हालांकि, 25 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई और ठेकेदार से जुड़े मुद्दों के कारण समयसीमा में थोड़ा बदलाव हो सकता है.
यह बोले नागरिक…
एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से शहर में यातायात की रफ्तार बढ़ेगी और लोगों को सफर में कम समय लगेगा. जन सुविधाओं को देखते हुए ऐसे निर्माण शहर के लिए बहुत जरूरी हैं.
– बबलू झरने
सात किलोमीटर इस लंबे मार्ग के बीच में जितने भी सिग्नल पढ़ते थे, अब वहां लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी, जिससे रोजाना आने-जाने वालों को बड़ी सुविधा होगी.
– कपिल लंभाते
बढ़ते शहर में वाहनों की संख्या और भविष्य को देखते हुए नई सडक़ व्यवस्था से इंदौर की तस्वीर बदलेगी. शहर और भी आधुनिक और व्यवस्थित नजर आएगा. यहां बेहतर पहल है.
-मोहम्मद इमरान
