
नई दिल्ली, 04 नवम्बर 2025: केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पब्लिक फंड की कथित हेरफेर और लॉन्ड्रिंग के एक मामले में रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनियों से जुड़ी लगभग 3,084 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 5(1) के तहत 31 अक्टूबर, 2025 को जारी किए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई। जब्त की गई संपत्तियों में मुंबई के पाली हिल स्थित घर, नई दिल्ली में रिलायंस सेंटर, तथा दिल्ली, नोएडा, मुंबई, पुणे और चेन्नई सहित कई शहरों में ऑफिस, आवासीय इकाइयाँ और भूमि पार्सल शामिल हैं।
यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) द्वारा जुटाए गए बैंकिंग लोन के हेरफेर और लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि 2017-19 के दौरान यस बैंक ने आरएचएफएल और आरसीएफएल के इंस्ट्रूमेंट्स में कुल 5,010 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो दिसंबर 2019 तक नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन गया। ईडी को सबूत मिले हैं कि म्यूचुअल फंड में आम जनता द्वारा निवेश किया गया पैसा, सेबी गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए, यस बैंक के एक्सपोजर के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों तक पहुँचाया गया।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी संस्थाओं को लोन दिए थे, जिससे फंड को अप्रत्यक्ष रूप से रूट किया गया। इस बीच, ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और संबंधित कंपनियों के लोन फ्रॉड स्कैम में भी अपनी जाँच तेज कर दी है। हालाँकि, एक खोजी समाचार वेबसाइट कोबरापोस्ट ने समूह पर ₹28,874 करोड़ से अधिक के बड़े बैंकिंग फ्रॉड का आरोप लगाया था, जिसे रिलायंस समूह ने “दुर्भावनापूर्ण और आधारहीन” बताकर खारिज कर दिया था।
