बुधनी। बुधनी वन परिक्षेत्र में सागौन की लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. फर्नीचर कारखानों तक दिनदहाड़े बड़ी मात्रा में सागौन की लकड़ी पहुंचाई जा रही है, जबकि वन विभाग इससे अनजान बना हुआ है.
गत दिवस स्थानीय मीडिया को सूत्रों से सूचना मिली कि सागौन की अवैध तस्करी खुलेआम की जा रही है.जानकारी मिलते ही पत्रकार मौके पर पहुंचे और रेलवे स्टेशन से कुछ कदम की दूरी पर मजदूरों को कंधे पर लकड़ी की सिल्लियां ढोते हुए देखा गया. मीडिया कर्मियों ने पीछा किया तो पाया कि यह लकड़ी माना क्षेत्र के एक स्थान पर पहुंचाई जा रही थी. भनक लगते ही लकड़ी ढोने वाले लोग लकड़ी वहीं छोड़कर भाग खड़े हुए. पत्रकारों ने तत्काल वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी. सूचना मिलने पर विभागीय दल मौके पर पहुंचा और अवैध सागौन की लकड़ी जब्त की.
गौरतलब है कि बुधनी वन परिक्षेत्र में लंबे समय से सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का धंधा फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ फर्नीचर कारखानों तक यह लकड़ी सीधे पहुंचाई जाती है, पर विभाग कभी-कभार केवल औपचारिक कार्यवाही कर ‘रस्म अदायगी करता नजर आता है.
हाल ही में जिले की वन मंडलाधिकारी अर्चना पटेल ने लाड़कुई वन परिक्षेत्र में तस्करी के मामलों पर पत्रकारों के सवालों से नाराज होकर विवाद खड़ा किया था. अब बुधनी में एक बार फिर पत्रकारों ने वन विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर किया है.
इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सागौन की लकड़ी की तस्करी के बढ़ते मामलों ने यह साबित कर दिया है कि अवैध कारोबारियों के हौंसले बुलंद हैं और वन विभाग की निगरानी बेहद कमजोर है. स्थानीय लोगों ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
गौरतलब है कि इससे पूर्व भी जब मीडिया ने डीएफओ से सागौन की कटाई को लेकर सवाल किए थे तो उन्होंने वहां मौजूद पत्रकारों पर ही लकड़ी चोरों से मिलीभगत का बयान दे दिया था. जिससे विभाग की काफी किरकिरी हुई है.
