नाराज महापौर बोले- शहर को कब तक यूं खोदोगे?

इंदौर:आज आखिर नगर निगम अधिकारी और ठेकेदारों के गठबंधन का एक नया मामला सामने आ गया. नई बनी सड़क स्ट्राम वॉटर लाइन डालने के लिए खोदी जा रही थी. नई सड़क खोदने की जानकारी राहगीर ने महापौर को वीडियो के माध्यम से दी थी. महापौर आज सुबह बिना बताएं मौके पर पहुंच गए और नजारा देख कर हतप्रद रह गए. मौके पर अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई और बोले आखिर शहर को कब यूं ही खोदते रहेंगे? महापौर के उक्त वचन सुनते ही अधिकारी सकते में आ गए।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव बिना किसी सूचना के अचानक तीन इमली चौराहे पर पहुंच गए.

इसकी न अधिकारियों को भनक थी, न किसी समर्थक को जानकारी दी गई. इसका कारण यह था कि नई बनी सड़क खुदवाई क्यों और कौन करवा रहा है और क्यों करवा रहा है? दरअसल कल रात एक राहगीर ने महापौर को वीडियो भेजा था, जिसमें यह दिख रहा था कि नई बनी सड़क को फिर से खोदा जा रहा है. महापौर को चूंकि इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने पूछताछ करने के बजाय सीधे मौके पर जाना बेहतर समझा. जब तीन चौराहे पर महापौर पहुंचे तो खुद भी चौंक गए. सड़क अभी पूरी बनी भी नहीं थी, आधा काम ही हुआ था और उसी पर फिर से खुदाई चल रही थी. उन्होंने तत्काल अपर आयुक्त अभय राजनगंवकर, जोनल अधिकारी अतीक खान, पार्षद राजेंद्र राठौड़ और निर्माण एजेंसी के साथ कंसलटेंट एजेंसी एसएनएस के प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाया.

अधिकारियों के पास नहीं था जबाव
महापौर ने नाराज होते हुए सख्त लहजे में पूछा कि सड़क पूरी बने बिना दोबारा खुदाई क्यों की जा रही है? जवाब मिला कि स्टॉर्म वॉटर लाइन डाली जा रही है. यह सुनते ही पर महापौर भड़क गए, बोले कि पहले नहीं पता था कि लाइन डालनी है? सड़क बनने के बाद खुदाई कौन-सी समझदारी है? उन्होंने कहा कि यह सीधी सीधी लापरवाही है. निगम को आर्थिक नुकसान और लोगों को परेशानी, दोनों की जिम्मेदारी तय होगी. उन्होंने अपर आयुक्त से कहा कि कंसलटेंट को हम अच्छा पैसा देते हैं, फिर ये कैसी मॉनिटरिंग कर रहा है? महापौर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूछा कि क्या अभी सड़क बनने के बाद इस इलाके में जलजमाव की कोई शिकायत आई थी? जिसके बाद यह लाइन जरूरी लगी हो? अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें
महापौर ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई करे. निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर टर्मिनेट कर दे और पेनल्टी भी लगाएं।. साथ ही नुकसान की भरपाई भी कंसल्टेंट एजेंसी से वसूली जाए.

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