एमपीएल की गर्वनिंग बाडी मात्र चार दिन में ही बदलना पड़ी

ग्वालियर। ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (जीडीसीए) द्वारा मध्यप्रदेश प्रीमियर लीग (एमपीएल) की बनाई गई गर्वनिंग बाडी मात्र चार दिन में ही बदल दी गई। गर्वनिंग बाडी बनाने में जीडीसीए के कर्ताधर्ताओं ने बड़ी चूक कर दी। चूक यह थी कि जो दो युवा जीडीसीए के मेंबर नहीं थे उन्हें भी एमपीएल की गर्वनिंग बाडी 2025-26 में मेंबर बनाकर ताजपोशी कर दी गई थी। यह सदस्य थे प्रदेश के उर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के पुत्र रिपुदमन सिंह तोमर और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निज सचिव पुरूषोत्तम पाराशर के भाई धीरज पाराशर। इन दोनों का जीडीसीए से कोई ताल्लुक नहीं था और न ही एमपीसीए से। फिर भी इन्हें एमपीएल की गर्वनिंग बाडी में शामिल कर लिया गया।

यहां बता दें कि एमपीसीए और जीडीसीए के मेंबर ही एमपीएल की गर्वनिंग काउंसिल में आ सकते थे। शुरूआत में जीडीसीए की मैनेजिंग कमेटी ने इन युवाओं के मनोनयन पर साइन भी कर दिये थे। शुरूआत में गवर्निंग बाडी में प्रशांत मेहता चेयरमैन, संजय आहूजा सचिव, रवि पाटनकर सीईओ, रिपुदमन सिंह तोमर व धीरज पाराशर मेंबर बनाये गये। यह आदेश 24 अक्टूबर को सचिव संजय आहूजा के हस्ताक्षर से निकाला गया। बाद में दो नये नवेलों के गवर्निंग बाडी में जुड़ने का काफी हो हल्ला मचा, जीडीसीए से जुड़े लोगों ने भी आपत्ति जताई। सोशल मीडिया पर भी यह मसला चलने लगा, तब केन्द्रीय मंत्री व जीडीसीए संरक्षक ज्योतिरादित्य सिंधिया तक मामला पहुंचा तो उन्होंने आनन फानन में चेयरमैन प्रशांत मेहता को फोन कर गर्वनिंग बाडी का लैटर बदलवा दिया। यह लैटर संशोधित होकर 28 अक्टूबर को निकाला गया और इसमे रिपुदमन सिंह व धीरज पाराशर की जगह संग्राम सिंह कदम व विजय प्रकाश शर्मा बेटू को शामिल किया गया। जीडीसीए के पदाधिकारी इस मामले पर चुप्पी साध गये है।

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