गंजबासौदा: ग्राम मसूदपुर में अवैध शराब का कारोबार और लत गरीब मजदूर परिवारों के जीवन पर कहर बनकर टूट रही है। गांव में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनके पुरुष और युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। महिलाओं का आरोप है कि यह धंधा गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में फल-फूल रहा है, ताकि गरीब परिवार कभी आत्मनिर्भर न बन सकें और हमेशा उनके अधीन रहें।
शराब की वजह से मजदूर काम पर नहीं जाते, घरों में कलह बढ़ गई है और बच्चे स्कूल छोड़कर इस अवैध धंधे में शामिल हो रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि नशे में धुत्त पुरुष आए दिन मारपीट करते हैं और परिवार का माहौल अशांत हो गया है।इस स्थिति से परेशान वार्ड क्रमांक 4 की कांग्रेस पार्षद श्रीमती नीलू मणि भाई अहिरवार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, मैं अपने वार्ड में किसी भी कीमत पर अवैध शराब नहीं बिकने दूंगी। इस जहर ने कई परिवारों को बर्बाद कर दिया है, बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
पार्षद के नेतृत्व में महिलाओं ने एकजुट होकर शराब बेचने वालों के खिलाफ प्रदर्शन किया और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपियों की सूची तैयार की। कई महिलाएं देहात थाने पहुंचीं और अपनी व्यथा बताई।पार्षद नीलू मणि ने बताया कि विरोध करने पर उनके ऊपर भी हमला हुआ था, जिससे उनका परिवार असुरक्षित महसूस कर रहा है। पुलिस ने मुख्य आरोपियों पर कार्रवाई करते हुए कुछ को जिला बदर किया है, परंतु गांव में अब भी कुछ लोग पर्दे के पीछे से शराब की आपूर्ति करा रहे हैं।
महिलाओं ने आरोप लगाया कि शराब घर-घर पहुंचाई जा रही है, और कई बार उधार में भी दी जाती है। कभी स्वच्छता और मेहनतकशी के लिए प्रसिद्ध मसूदपुर गांव अब शराब के चलते बदनाम हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वे इस अवैध कारोबार के असली सरगनाओं पर भी कार्रवाई करें ताकि गांव की खोई हुई पहचान वापस मिल सके।
