टीकमगढ़: जिले के बेला तालाब मजना में मछलियों में फैल रही घातक बीमारी लाल घाव रोग (Epizootic Ulcerative Syndrome – EUS) ने मछली पालकों की चिंता बढ़ा दी है। रोग की सूचना मिलते ही कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ ने तत्काल कार्रवाई की।वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार के निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. सतेंद्र कुमार ने मौके पर पहुंचकर तालाब का निरीक्षण किया।
देगना बाबा मत्स्य मछुआ समिति मजना द्वारा संचालित इस तालाब में मछलियों पर ईयूएस के लक्षण स्पष्ट रूप से पाए गए। यह रोग मुख्यतः सर्दी के मौसम में पनपता है और तेजी से फैलता है। मछलियों के शरीर पर लाल दाग बनने से शुरू होकर यह गहरे घाव में बदल जाता है, जिससे अंततः मछलियों की मृत्यु हो जाती है।डॉ. कुमार ने रोग नियंत्रण हेतु वैज्ञानिक उपाय सुझाए, तालाब में 600 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से सामान्य चूना और जल आयतन के 1 प्रतिशत की दर से नमक डालने की सलाह दी। साथ ही, पीएच संतुलन बनाए रखने, बाहरी तत्वों के प्रवेश पर नियंत्रण और जैव सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
उपचार के लिए कली चूना व हल्दी के चूर्ण का मिश्रण तथा सीआईएफएएक्स दवा का उपयोग भी प्रभावी बताया गया।डॉ. बी.एस. किरार ने कहा कि ईयूएस गंभीर महामारी है, लेकिन समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मछली पालक सर्दी के मौसम में विशेष सतर्क रहें और लक्षण दिखते ही तुरंत केवीके से संपर्क करें।
