
छतरपुर।आज गजल से देशभर में छाए मध्यप्रदेश के महेश्वर के नर्मदा तट पर बनी एक झोपड़ी में रहने वाले आदिवासी गायक अमित धुर्वे की जिंदगी एक फोन कॉल ने बदल दी। नवरात्रि शुरू होने से ठीक पहले रात करीब ढाई बजे उन्हें बागेश्वर धाम से फोन आया। दूसरी तरफ से स्वयं पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री थे। उन्होंने अमित से कहा—“नवरात्रि में धाम आना है और अपने भजन सुनाने हैं।”
अमित के लिए यह क्षण किसी सपने से कम नहीं था। बागेश्वर धाम के मंच से गाई गई उनकी गजल कुछ ही दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। आज उन्हें कनाडा से लेकर टी-सीरीज जैसी बड़ी कंपनियों से गाने के ऑफर मिल चुके हैं।
लेकिन अमित का यह सफर आसान नहीं रहा। 10-11 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया था। कटनी रेलवे स्टेशन पर उन्हें कुछ बच्चे मिले जो ट्रेन में पत्थर बजाकर गाते और मांगकर अपना पेट भरते थे। अमित भी उन्हीं के साथ गाने लगे और धीरे-धीरे संगीत सीखते गए। दिनभर की थकान के बाद रात को वे अपनी झोपड़ी में लौटते, जहां पिता और बहन के साथ रहते थे।
