शाजापुर:भावसार मोहल्ला निवासी स्व. मदनलाल भावसार चौधरी का पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। परचून की दुकान पर आने वाले ग्राहकों से लेकर चौक चौपाल पर मिलने वाले लोगों तक, हर किसी को वे शाखा में आने का आग्रह करते और संघ की विचारधारा समझाते।आपातकाल (1975) के दौरान पुलिस उनकी तलाश करती रही, वे भूमिगत भी हुए, लेकिन अडिग रहे। उनका कहना था,संघ मेरी आत्मा है, मैं इसे नहीं छोड़ सकता।
1927 में जन्मे और 2018 में दिवंगत हुए भावसारजी, दादा स्व. घासीराम की प्रेरणा से 1950 के बाद संघ से जुड़े। द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोवलकर के विचारों से प्रभावित होकर आजीवन स्वयंसेवक बने। अनुशासन व निष्ठा उनके जीवन की पहचान रही। निजी लाभ के अवसर भी उन्होंने ठुकरा दिए।साधारण जीवन जीते हुए वे धोती कुर्ता पहनते, किंतु संघ कार्यक्रमों में सदैव पूर्ण गणवेश में ही जाते। उनके तीनों बेटे आज इस बात पर गर्व करते हैं कि उनके पिता ने संघ को ही जीवन का ध्येय बनाया।
