कम दामों से सोयाबीन उत्पादक परेशान, समर्थन मूल्य पर खरीदी की प्रतीक्षा

सीहोर। मंडी में नए सोयाबीन की आवक शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक हो चुका है, लेकिन किसानों को उचित दाम न मिलने से वे निराश हैं. अभी तक नए सोयाबीन का अधिकतम भाव 3600 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहा है, जबकि किसानों को सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य 5328 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी का इंतजार है.

किसानों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद मंडी में कम दाम मिल रहे हैं. वहीं समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए पंजीयन प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है. पंजीयन 25 सितंबर से 20 अक्टूबर तक होना है, जिसके बाद खरीदी केंद्र स्थापित किए जाएंगे. प्रशासनिक तैयारियों की सुस्ती से किसानों को आशंका है कि खरीदी समय पर शुरू नहीं हो पाएगी.

लगातार हो रही रुक-रुक कर बारिश से खड़ी फसल में नमी बढ़ गई है, जिससे हार्वेस्टर का उपयोग मुश्किल हो गया है और मजदूर भी कटाई के लिए नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में खेतों में उपज अंकुरित होने का खतरा है और किसान दोहरे नुकसान से जूझ रहे हैं.

मंगलवार को सीहोर मंडी में लगभग 400 क्विंटल नया सोयाबीन बिकने आया, जिसका अधिकतम भाव 3600 रुपये रहा. वहीं पुराने सोयाबीन का भाव 4400 रुपये प्रति क्विंटल तक देखने को मिला.

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

अखिल भारतीय कांग्रेस सदस्य हरपाल ठाकुर ने कहा कि जब 2013-14 में कांग्रेस सरकार थी, तब समर्थन मूल्य 2560 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद मंडियों में सोयाबीन 4000-5000 रुपये तक बिकता था. आज भाजपा सरकार में समर्थन मूल्य 5328 रुपये घोषित होने के बावजूद किसानों को केवल 3000 रुपये मिल रहे हैं.उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों ने किसानों की आमदनी घटाई है.

मंडी सचिव का अनुमान

कृषि उपज मंडी सचिव नरेंद्र महेश्वरी ने बताया कि वर्षा के कारण नए सोयाबीन में नमी अधिक है, जिससे फिलहाल दाम कम हैं. मौसम साफ होते ही नमी घटेगी और सोयाबीन के भाव बढ़ने की संभावना है.

 

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