विश्व आर्थिक मंच ने की भारतीय अर्थव्यवस्था की सराहना

न्यूयॉर्क/नयी दिल्ली, (वार्ता) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, संसाधनों एवं संस्थानों में पिछले कुछ समय से जारी उथल-पुथल के कारण बने रहे नये आर्थिक माहौल में वैश्विक विकास की गति सुस्त होगी, हालांकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, “अमेरिका (विश्व) युद्ध के बाद मुक्त बाजार के नेतृत्वकर्ता की अपनी भूमिका से पीछे हट चुका है, चीन अपना आर्थिक बाहुबल दिखा रहा है, जर्मनी ने वित्तीय अनुशासन को छोड़ दिया है, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है और जापान मौजूदा पीढ़ी में पहली बार मुद्रास्फीति से जूझ रहा है।”
विश्व आर्थिक मंच ने न्यूयॉर्क में जारी चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक नामक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में मुद्रास्फीति में तेजी से गिरावट आयी है जिससे नीतियों में स्थिरता के लिए गुंजाइश बनी है, सरकार राजस्व घाटे को 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने के लिए प्रतिबद्ध है और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की गयी है। हालांकि भारतीय विनिर्माण के समक्ष हाल में अमेरिका द्वारा लगाये गये 50 प्रतिशत आयात शुल्क की चुनौती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 72 प्रतिशत अर्थशास्त्री मानते हैं कि व्यापारिक संकट, नीतियों में बढ़ती अनिश्चितता और प्रौद्योगिकी बदलावों के कारण अगले साल वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त रहेगी। उनका मानना है कि वैश्विक विकास को उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से गति मिलेगी। पश्चिम एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के देश ऐसे में चमकते सितारे साबित होंगे।
चीन के लिए परिदृश्य मिश्रित बताया गया है क्योंकि 56 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वहां विकास की गति कुछ धीमी रहेगी।

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