सीहोर।जिले के किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं. पहले से ही अतिवर्षा ने खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल को तहस-नहस कर दिया और अब लगातार हो रही वर्षा एवं जलभराव ने बची हुई फसल भी बर्बाद कर दी. खेतों में पानी भरने से पक चुकी फलियां सड़ रही हैं और किसानों की मेहनत डूब गई.
ग्राम चंदेरी, बरखेड़ी, हीरापुर, कुल्लास छोटी रामाखेड़ी, बमुलिया सहित कई गांवों के किसानों का कहना है कि खुलासी नदी में आई बाढ़ ने उनकी अंतिम उम्मीद भी छीन ली. जो 25 प्रतिशत फसल किसी तरह बची थी, वह भी पानी में डूब गई. किसान दिन-रात खेतों में घुटने-घुटने पानी से अपनी फसल को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. लेकिन हालात हाथ से निकलते जा रहे हैं.
किसानों ने प्रशासन से मांग है कि पिछले एक महीने से लगातार जिला प्रशासन से खराब फसल का सर्वे कर बीमा राशि दिलाने की मांग की जा रही है, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही. किसान हर हफ्ते ज्ञापन देकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से गुहार लगा रहे हैं कि जल्दी सर्वे कराया जाए व बीमा राशि दिलाई जाए. वरना पूरी मेहनत पर पानी फिर चुका है.किसानों का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है.
