कोलकाता, (वार्ता) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में हाल के सुधारों से उपभोग में वृद्धि होगी और कर बोझ कम होगा तथा इसके परिणाम स्वरूप अर्थव्यवस्था में लगभग दो लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद है।
श्रीमती सीतारमण यहां जीएसटी सुधारों पर चर्चा में भाग ले रही थीं। उन्होंने कहा कि नयी पीढ़ी की जीएसटी प्रणाली न केवल दरों को कम करने और नागरिकों पर बोझ कम करने के के लिए है बल्कि व्यवसायों के सामने आने वाले भ्रम को दूर करने के लिए भी है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से शांतिनिकेतन के चमड़े के सामान या पुरुलिया के मुखौटे जैसे बंगाल के हस्तशिल्प उत्पादों पर कर का बोझ कम होगा।
बैठक में उपस्थित उद्योगपतियों, हितधारकों और आम लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के तहत केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए क्रांतिकारी कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये सुधार कर ढांचे को सरल बनाने, सामर्थ्य बढ़ाने, अनुपालन को मज़बूत करने और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किये गये हैं। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
अपने संबोधन में उन्होंने दूसरी पीढ़ी के जीएसटी सुधारों की विभिन्न संभावनाओं का अनुमान लगाया, जो 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सुधार ऐसे समय किये गये हैं जबकि बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत होने जा रही है और जीएसटी का सुधरा रूप नागरिकों और उद्योगों दोनों के लिए राहत और उत्सव का प्रतीक है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन सुधारों से उपभोग में वृद्धि और कर बोझ में कमी के कारण अर्थव्यवस्था में लगभग दो लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद है।
श्रीमती सीतारमण ने जीएसटी स्लैब को युक्तिसंगत बनाने के बारे में विस्तार से चर्चा की, जिसके तहत अब अधिकांश वस्तुएं और सेवाएं आवश्यक वस्तुओं के लिए पांच प्रतिशत और अन्य वस्तुओं के लिए 18 प्रतिशत की प्राथमिक दरों के अंतर्गत आ गई हैं, कई आवश्यक खाद्य वस्तुओं, दवाओं, स्वास्थ्य बीमा और दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी में कमी की गई है, जिससे घरेलू बजट आसान हो गया है, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल शिक्षण उपकरण और शैक्षणिक संस्थानों के लिए वस्तुओं पर जीएसटी दरें कम हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि शांतिनिकेतन के चमड़ाें के सामान बांकुड़ा पंचमुरा टेराकोटा शिल्प – जीएसटी,· पुरुलिया छऊ मास्क, नक्षी कंथा , प्रसंस्कृत मालदा आम और दर्जिलिंग चाय पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि इससे पश्चिम बंगाल के कारीगरों, किसानों और छोटे उद्यमियों को सीधे तौर पर सशक्त बनाएंगे, जिससे उनके उत्पाद घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
उन्होंने दोहराया कि सरलीकृत स्लैब और कम दरें न केवल आम नागरिकों को राहत देने के लिए तैयार की गई हैं, बल्कि व्यवसायों, विशेष रूप से एमएसएमई और उद्योगपतियों के लिए एक पूर्वानुमानित और निष्पक्ष वातावरण बनाने के लिए भी तैयार की गयी हैं।
