शहडोल में बदल रही सियासी तस्वीर

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

संगठन में हुए बदलाव और नए नेतृत्व के उदय ने शहडोल की भाजपाई सियासत को नया रूप दे दिया है। अब मंचों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह चेहरे नजर आने लगे हैं जो एक-डेढ़ दशक से लगभग हाशिए पर नजर आ रहे थे। इनमें से कई चेहरे तो ऐसे हैं जिनकी सांगठनिक क्षमताओं के लोग कायल रहे, मगर नये शक्ति केंद्र उभरने के चलते उन्हें नेपथ्य में जाना पड़ गया। पिछले दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शहडोल प्रवास हुआ।

उनके दौरे के बाद सोशल मीडिया में कुछ तस्वीरें वायरल हुईं जिसके चलते भाजपाई हल्कों में नई चर्चाओं का बाजार सरगर्म हो गया। इनमें से एक तस्वीर भगवादल की जिला अध्यक्ष अमिता चपरा ने साझा की, जिसमें वह मुख्यमंत्री के साथ जयसिंह नगर विधायक मनीषा सिंह, वरिष्ठ नेता दौलत मनवानी, अमित मिश्रा के साथ नजर आ रहीं हैं। स्मरण रहे कि भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष कमलप्रताप सिंह के कार्यकाल में स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कामकाज उनके एवं कुछ खास समर्थकों के इशारे पर केंद्रित होता था, किन्तु अब परिदृश्य बदला-बदला नजर आने लगा है।

कुछ समय पूर्व तक विधायक मनीषा सिंह तथा अमिता चपरा के मध्य एक तनावमिश्रित दीवार खड़ी दिखाई देती थी, अब वह अमिता चपरा के साथ मंच साझा करती दिखाई देतीं हैं, वहीं दौलत मनवानी एवं अमित मिश्रा पहले की तुलना में ज्यादा सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। स्थानीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि हालिया वायरल तस्वीरें महज रस्मी मुलाकात की बानगी नहीं, अपितु यह संकेत हैं कि अब शहडोल के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में एक नई धुरी उभर रही है, जिसका प्रभाव पार्टी के सांगठनिक कामकाज के साथ जिले के विकास कार्यों पर भी पड़ेगा।

वायरल हुआ बरगी विधायक का जश्न

बीते कुछ दिनों में देखा गया है कि सत्ता का नशा भाजपा विधायकों में इस कदर चढ़ गया है कि वो प्रशासन को भी चुनौती देने से नहीं चूक रहे हैं। ताजे मामले की बात करें तो बरगी विधायक नीरज सिंह लोधी ने अपने जन्मदिवस पर तलवार लहराते हुए केक काटा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जैसे ही विधायक द्वारा तलवार से केक काटने का वीडियो जनता के सामने आया, उसके थोड़ी देर बाद जनता की ओर ये प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं कि जबलपुर का कोई भी आम नागरिक ऐसे तलवार लहराकर केक काटता तो स्थानीय पुलिस उसे ढ़ूंढ़कर ऑर्म्स एक्ट के तहत अपराधी बनाकर कार्रवाई कर देती लेकिन इस मामले में सत्ता पक्ष के विधायक ने ये काम किया है, इसलिए पुलिस ने भी हाथ नहीं डाला है।

इससे ये साफ हो गया है कि सारे नियम कानून सिर्फ जनता के लिए ही हैं। सत्ताधारी पार्टी के नेता , विधायकों के लिए ये कानून कोई मायने नहीं रखते। इसके पहले कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा के विधायक संजय पाठक ने लंबित प्रकरण के सिलसिले में मप्र हाईकोर्ट के न्यायाधीश को फोन लगाने की कोशिश की थी। इस मामले ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं थीं।चर्चा है की संजय पाठक के इस कृत्य के बाद उनके केस की पैरवी करने में अधिवक्ता कन्नी काटना चाह रहे हैं। आगे क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा, मगर इन मामलों से यह साफ जाहिर हो रहा है कि यदि आप सत्ता पक्ष में हो तो आप कानून के सिस्टम को भी झुका सकते हो।

ए ग्रेड की कामयाबी पर पलीता लगा रहे जिम्मेदार

हर बार की तरह इस बार भी रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय नए शैक्षणिक सत्र के 5 महीने बीत जाने के बाद किसी भी विषय के परीक्षा परिणाम घोषित नहीं कर पाया है। विदित हो कि पहले नैक द्वारा ए ग्रेड यूनिर्वर्सिटी का दर्जा दिया गया था लेकिन विश्वविद्यालय के लापरवाह कर्मचारी इस रैकिंग पर पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। नतीजा विवि के छात्र अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। छात्र संगठन ने इस विषय को लेकर हाल ही में प्रदर्शन भी किया था, छात्रों के ज्यादा विरोध के बाद रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेश वर्मा ने ये स्वीकार किया है कि रिजल्ट में देरी हो रही है और उन्होनें अब मूल्यांकन कार्य में तेजी लाने अधीनस्थों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

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