‘भारत-यूरोपी प्रस्तावित संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में पूरी गहनता से लगे हैं’

नयी दिल्ली, 13 सितंबर (वार्ता) भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के अंतराष्ट्रीय व्यापार और उद्योग प्रभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को यहां संकेत दिया कि दोनों पक्ष आपस में प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को इस समय गहन बातचीत के माध्यम से अंतिम रूप दे रहे हैं और यह समझौता इस वर्ष के अंत तक हो सकता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ईयू के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा, अंतर-संस्थागत संबंध एवं पारदर्शिता आयुक्त मारोस शेफोविच ने यहां उद्यमियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए एफटीए वार्ता में प्रगति के संकेत दिये।
श्री गोयल ने ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के 65वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक संतुललित एफटीए के लिए ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत-ईयू एफटीए से देश के ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र के लिए विकास, सहयोग और नवाचार के नए अवसर खुलेंगे।
इसी सत्र में ईयू आयुक्त श्री शेफोविच ने कहा कि भारत-ईयू वर्ष के अंत तक एक अभूतपूर्व मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं और दोनों के बीच इस समय अभूतपूर्व तेजी और गहनता से बातचीत चल रही है।
श्री गोयल ने कहा कि इस एफटीए से दोनों पक्षों के व्यवसायों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा। मंत्री ने कहा कि ऐसा समझौता एकतरफ़ा नहीं हो सकता, क्योंकि हर बातचीत में निष्पक्षता और संतुलन सुनिश्चित करने के लिए कुछ हद तक लेन-देन शामिल होता है। उन्होंने यह भी कहा, ‘एक आदर्श समझौते की तलाश को प्रगति का दुश्मन न बनने दिया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऑटोमोटिव कंपोनेंट क्षेत्र, जिसने शुरू से एफटीए वार्ताओं को मज़बूती प्रदान की है।
सत्र को संबोधित करते हुए श्री शेफोविच ने कहा, “भारत और ईयू अभूतपूर्व गति से एक अभूतपूर्व एफटीए पर बातचीत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यह बातचीत दोनों भागीदरों के बीच अब तक की सबसे गहन और रचनात्मक चर्चाओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि यद्यपि मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत के प्रयास पहले भी किए गए लेकिन यह प्रक्रिया पहले कभी इतनी गंभीरता, आपसी विश्वास और साझा महत्वाकांक्षा के स्तर तक नहीं पहुंची थी।
ईयू के आयुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा पूर्व में की गई प्रतिबद्धता के अनुरूप, वर्ष के अंत तक वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए अधिकतम प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों पक्ष एक ऐसा आर्थिक रूप से सार्थक पैकेज बनाने का प्रयास कर रहे हैं जो उत्पादकों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं के हितों को समान रूप से संतुलित करे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसका उद्देश्य एक ऐसे वास्तविक लाभप्रद समझौते पर पहुंचना है जो न केवल वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाए, बल्कि दोनों क्षेत्रों के बीच निवेश, नवाचार, सतत प्रथाओं और गहन सहयोग को भी बढ़ावा दे।
उन्होंने आगे कहा कि भारत तेज़ी से वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख इंजन बन रहा है और भारत के साथ एक मज़बूत आर्थिक साझेदारी यूरोपीय संघ के लिए महत्वपूर्ण मूल्यवर्धन करेगी, ठीक उसी तरह जैसे यूरोप की तकनीक और पैमाने भारत की विकास गाथा को लाभान्वित करेंगे।
श्री गोयल ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर ( जीएसटी) की दरों को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक ऐतिहासिक सुधार है और ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। ट्रैक्टरों के लिए, जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र को बहुत बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों का यह दौर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार है और इससे हर भारतीय को लाभ होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 1.4 अरब लोगों में से एक भी नागरिक ऐसा नहीं होगा जिसे इन सुधारों से लाभ न मिले।

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