भोपाल। मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि जीवन को सही दिशा देना ही परमार्थ है। उन्होंने अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए बताया कि पुण्य कार्य न करने वाला जीवन व्यर्थ है, पाप व शोषण में लगा जीवन अनर्थ है और संसाधनों को सदुपयोग में लगाना परमार्थ है। मुनि श्री ने कहा कि दूध दुहना अर्थ है, फटना व्यर्थ, ढोल देना अनर्थ और घी निकालना परमार्थ है। जीवन भी ऐसा ही है, इसे सही दिशा दो अन्यथा यह व्यर्थ हो जाएगा। उन्होंने डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबल का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने मृत्यु के बाद मौत का सौदागर कहलाने के बजाय शांति हेतु संपत्ति समर्पित कर नोबल पुरस्कार की स्थापना की। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि रविवार 1:30 बजे वृहद क्षमावाणी पर्व आयोजित होगा, जिसमें श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि सम्मिलित होंगे।
जीवन का सही उपयोग ही परमार्थ
