नयी दिल्ली, 11 सितंबर (वार्ता) नकली उत्पादों की वृद्धि के साथ इस समस्या से निपटने की आवश्यकता भी बढ़ गयी है जिससे देश के ऑथेंटिकेशन एवं ट्रेसबिलिटी (एएंडटी) बाजार के अगले पांच साल में 11.3 प्रतिशत की औसत वार्षिक दर से बढ़ने की उम्मीद है।
ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (एएसपीए) और एक्सेंचुअर की हाल में जारी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 में देश का एएंडटी बाजार 9,705 करोड़ रुपये का था। पिछले चार वर्ष में इसकी औसत वार्षिक वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रही थी। अगले पांच साल में 2028-29 तक इसके 11.3 प्रतिशत औसत की दर से बढ़ते हुये 16,575 करोड़ रुपये पर पहुंचने की उम्मीद है।
एशिया प्रशांत क्षेत्र से तुलना करें तो यह वृद्धि दर कम है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में वैश्विक एएंडटी बाजार 147 अरब डॉलर का था और 2032 तक इसके 382 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस वृद्धि का नेतृत्व करेगा, जहां 14.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी।
देश में एएंडटी अपनाने वालों में फार्मास्युटिकल्स (17 प्रतिशत), टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद (14 प्रतिशत), कॉस्मेटिक्स (13 प्रतिशत) और वाहनों के कलपुर्जे (13 प्रतिशत) सबसे आगे हैं। नकली उत्पादों में वृद्धि, ई-कॉमर्स का विस्तार, उपभोक्ता जागरूकता और नियामकीय आवश्यकताओं जैसे कारक इस क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं। पारंपरिक तकनीकें जैसे होलोग्राम और क्यूआर कोड अब भी प्रमुख हैं, लेकिन ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एआई और फिजिटल (फिजिकल प्लस डिजिटल) समाधान जैसी नयी पीढ़ी की तकनीकों में रुचि लगातार बढ़ रही है।
एएसपीए के अध्यक्ष मनोज कोचर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “यह रिपोर्ट देश की नकली उत्पादों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण पड़ाव है। ऑथेंटिकेशन और ट्रेसबिलिटी अब वैकल्पिक नहीं रहे – ये उपभोक्ताओं की सुरक्षा, ब्रांड की रक्षा और बाजार में विश्वास निर्माण के लिए अनिवार्य हैं।”
