
नयी दिल्ली, 09 सितंबर (वार्ता) दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण परिपत्र जारी करके अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया
जिसके बाद सभी जिला कोर्ट बार संघों के समन्वय समिति ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।
दरअसल इस नए परिपत्र (संख्या: 9952-77/सीपी सेक्शन, दिनांक 8/9/2025) के अनुसार, सभी आपराधिक मुकदमों में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को गवाही या साक्ष्य प्रस्तुति के लिए माननीय न्यायालयों में शारीरिक रूप से पेश होना होगा। यह निर्णय दिल्ली के पुलिस आयुक्त की मंजूरी से लिया गया है, जो इससे पहले चार सितंबर के परिपत्र (संख्या: 9860-72/सीपी सेक्शन/पीएचक्यू) को रद्द करता है, जिसमें पुलिस थानों से वीडियो संवाद के जरिए गवाही की अनुमति दी गई थी। यह कदम दिल्ली की सभी जिला कोर्ट बार संघों के समन्वय समिति की मांग के अनुरूप है।
समिति ने आज हुई बैठक में इस बदलाव के बाद काम से परहेज करने की अपनी अपील को वापस लेने का फैसला किया। इसके साथ ही वकीलों ने अपने-अपने मामलों को कल, यानी नौ सितंबर से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्णय लिया है। वकीलों ने पिछले एक सप्ताह से पुलिस थानों से वीडियो संवाद के जरिए गवाही दर्ज करने के खिलाफ न्यायिक बहिष्कार का आंदोलन चलाया था। इस बदलाव से पहले, गत दो सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ वकीलों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी, जिसमें श्री शाह ने आश्वासन दिया था कि अभी पुलिसकर्मियों की गवाही कोर्ट कक्षों में शारीरिक रूप से ही होगी।
वकील नेताओं के अनुसार, यह निर्णय उनके लंबे संघर्ष की जीत है। समन्वय समिति ने इससे पहले छह सितंबर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा के हड़ताल वापस लेने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया था, लेकिन अब नई नीति के साथ स्थिति सकारात्मक दिशा में दिख रही है।
