जबलपुर: रानी दुर्गावती लेडी एल्गिन अस्पताल में सबसे पहले इलाज की चाह रखने वाली महिलाओं के कारण गंभीर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण में देरी की खबर सामने आ रही है। वजह टोकन नंबर के आधार पर महिलाएं डॉक्टर के पास इलाज के लिए नहीं पहुंच रहीं हैं जिसका खामियाजा उन गंभीर गर्भवती महिलाओं को करना पड़ रहा है जिन्हें वास्तव में जल्दी इलाज की जरूरत है।
ऐसे में सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा का स्पष्ट कहना है कि व्यवस्था ऐसे में कैसे सुधरेगी। जब कोई सिस्टम अस्पताल में आने वाली महिलाएं मानने तैयार ही नहीं हैं।जानकारी के अनुसार एल्गिन अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 250 महिला मरीज इलाज के लिए आतीं हैं। जहां प्रतिदिन करीब 20 से 40 महिलाओं की डिलेवरी भी की जाती है और साथ ही करीब 50 महिलाओं को प्रतिदिन अस्पताल में भर्ती भी किया जाता है।
क्या है क्यूलेस सिस्टम ?
जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा रानी दुर्गावती लेडी एल्गिन अस्पताल में क्यूलेस सिस्टम लागू काने कई जतन किए गए हैं। क्यूलेस सिस्टम का मतलब अस्पताल में कोई भी मरीज लाइन में नहीं लगा रहे और वह अस्पताल की कुर्सी में बैठकर बारी-बारी से संबंधित डॉक्टर से अपना परीक्षण कराए। एल्गिल अस्पताल में अभी गर्भवती महिलाओं व महिला मरीजों को लाइन में न लगना पड़े इसके लिए टोकन सिस्टम की व्यवस्था की गई है।
डॉक्टर के केबिन में सामने कतार लगाने आमादा महिलाएं: सीएमएचओ
सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा ने नवभारत को बताया कि एल्गिन अस्पताल में गर्भवती महिलाओं और महिला मरीजों को कोई परेशानी न हो इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। अस्पताल में टोकन महिलाओं को दिया जाता है और निर्देश दिए जाते हैं कि वे डॉक्टर के कमरे के सामने लाइन लगाकर न खड़ी रहें बल्कि अस्पताल में मौजूद कुर्सियों में बैठकर अपने-अपने टोकन नंबर का इंतजार करें और जब नंबर आए तो डॉक्टर के कमरे में इलाज के लिए जाएं।
लेकिन हकीकत अस्पताल के अंदर की कुछ और ही है। श्री मिश्रा ने नवभारत से ये भी कहा कि अस्पताल में आने वाली महिलाएं टोकन व्यवस्था को न मानते हुए डॉक्टर के कमरे के सामने लाइन लगाकर खड़ी रहतीं हैं ऐसे में वास्तव में गंभीर गर्भवती महिला को समय पर इलाज मिलने पर मुश्किल का सामना करना पड़ जाता है। क्योंकि वो लाइन में सबसे आखिरी में होती हैं।
