मुंबई, 02 सितम्बर (वार्ता) वैश्विक फार्मा कंपनी जाइडस लाइफसाइंसेज लिमिटेड ने मंगलवार को देश में पहली बार अपना ट्राइवेलेन्ट इन्फ्लुएंजा वैक्सीन ‘वैक्सीफ्लू’ के नाम से पेश किया है।
कंपनी ने बताया कि वैक्सीफ्लू विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वैश्विक जरूरतों के अनुरूप है। मौसमी सर्दी-खांसी-जुकाम (इन्फ्लूएंजा) हर साल गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी रहती है, जिससे 30-50 लाख लोग गंभीर रूप से बीमार होते हैं और लगभग 2.9 लाख से 6.5 लाख लोग श्वसन संबंधी कारणों से मौत का शिकार हो जाते हैं। यह बीमारी बच्चों, बुज़ुर्गों और असाध्य रोगों से जूझ रहे लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत पर जाइडस लाइफसाइंसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शारविल पटेल ने कहा, “आज जब हम कई तरह की संक्रामक और संचारी बीमारियों से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए उचित टीके की बहुत जरूरत है। हमारी कोशिश हमेशा यही रही है कि हम वैश्विक दिशा-निर्देशों के अनुरूप समय पर टीका उपलब्ध करायें, क्योंकि यह सुरक्षात्मक स्वास्थ्य देखभाल का सबसे अहम हिस्सा है। हमें पूरा विश्वास है कि इससे टीके से बचाई जा सकने वाली बीमारियां और उनसे जुड़ी जटिलताएं, खासकर उच्च जोखिम वाले समूहों में, काफी कम हो जायेंगी।”
पहले फ्लू के लिए क्वाड्रावेलेन्ट टीके लगाये जाते थे, लेकिन डब्ल्यूएचओ की 2025-26 की सिफारिशों के अनुसार, मार्च 2020 से बी/यामागाटा वायरस का लगातार न होना दिखाता है कि उसके संक्रमण का जोखिम बहुत कम है। इसी वजह से अब वैक्सीन में इस स्ट्रेन को शामिल करना जरूरी नहीं माना जाता। भारत सरकार के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने भी एनएच 2025-26 में ट्राइवेलेन्ट इन्फ्लुएंजा वैक्सीन के इस्तेमाल की सिफारिश की है। जाइडस ने बताया कि वैक्सीफ्लू टीका छह महीने और उससे ऊपर की उम्र वाले व्यक्तियों को लगाया जा सकता है।
